Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lokbharti Chapter 6 गिरिधर नागर
Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 6 गिरिधर नागर Textbook Questions and Answers
कृति
(कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए)
सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए:




अर्थ | शब्द | |
i. | दासी | …………. |
ii. | साजन | …………. |
iii. | बार-बार | …………. |
iv. | आकाश | …………. |
अर्थ | शब्द | |
i. | दासी | चेरी |
ii. | साजन | पति |
iii. | बार-बार | बेर-बेर |
iv. | आकाश | अंबर
प्रश्न 4
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कन्हैया के नाम
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 5
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दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) निकट – ढिग (ii) साजन – पति।
उपयोजित लेखन निम्नलिखित शब्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए तथा उचित शीर्षक दीजिए: गिलहरी कुछ देर बाद धीरे-धीरे मेज पर घूमने लगी। मेज पर एक प्लेट में चावल के पापड़ रखे थे। गिलहरी ने एक पापड़ उठाया और अपने अगले दोनों पंजों में पकड़कर धीरे-धीरे उसे खाने लगी। चिंटू को बहुत अच्छा लगा। उसने माँ से पूछा कि जब तक गिलहरी बिलकुल ठीक नहीं हो जाती क्या मैं उसे अपने पास रख सकता हूँ। अभी अगर वह बाहर जाएगी तो कौए उसे अपना आहार बना लेंगे। माँ को चिंटू की ऐसी सोच पर गर्व हुआ और उन्होंने खुशी-खुशी उसकी बात मान ली। चिंटू ने अपनी किताबों की खुली आलमारी के एक खाने में एक तौलिया बिछाकर गिलहरी को बैठा दिया। उसके पास चावल के कुछ पापड़ तथा अमरूद के कुछ टुकड़े रख दिए। तीन-चार दिन बाद जब गिलहरी अच्छी तरह दौड़ने लगी तो चिंटू ने उसे बाहर पेड़ पर छोड़ दिया। सीख: हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखना चाहिए। अपठित पद्यांश सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:- काम जरा लेकर देखो, सख्त बात से नहीं स्नेह से – (भवानी प्रसाद मिश्र)
प्रश्न 1
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उत्तर लिखिए: a. किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्त – …………. b. हर समय अच्छी लगने वाली बात – ………….
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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उत्तर लिखिए: a. अच्छा प्रयत्न यही है – …………. b. यही अधोगति है – ………….
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3
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पद्यांश की तीसरी और चौथी पंक्ति का संदेश लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
भाषा बिंदु कोष्ठक में दिए गए प्रत्येक/कारक चिह्न से अलग-अलग वाक्य बनाइए और उनके कारक लिखिए: Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 6 गिरिधर नागर Additional Important Questions and Answers पद्यांश क्र. 1 प्रश्न. कृति 1: (आकलन)
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए: (i)
Solution & Step-by-Step Answer:
(ii) a. श्रीकृष्ण के सिर पर है
प्रश्न 2
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संजाल पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3
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उचित जोड़ियाँ मिलाइए: |
अ | आ |
आँसुओं के जल से | छोड़ दी |
अ | आ |
आँसुओं के जल से | प्रेम की बेल सींचा। कृति 2: (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
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निम्नलिखित शब्दों को शुद्ध रूप में लिखिए: (i) भगत – ……………………. (ii) माखन – ……………………. (iii) आणंद – ……………………. (iv) जाके – …………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) भगत – भक्त (ii) माखन – मक्खन (iii) आणंद – आनंद (iv) जाके – जिसके।
प्रश्न 2
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निम्नालाखत शब्दा क समानाथा शब्दालाखए: (i) मोर = ……………………. (ii) जगत = ……………………. (iii) दूध = ……………………. (iv) प्रेम = …………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) मोर = मयूर (ii) जगत = संसार (iii) दूध = दुग्ध (iv) प्रेम = प्यार।
प्रश्न 3
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निम्नलिखित अर्थवाले शब्द पद्यांश से चुनकर लिखिए: (i) उद्घार करो – ……………………. (ii) मुझे – …………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) उद्घार करो – तारो (ii) मुझे – मोही।
कृति 3: (सरल अर्थ) प्रश्न. पद्यांश क्र. 2 प्रश्न. कृति 1: (आकलन)
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए: |
(i) ये मीरा के प्रतिपालक हैं
(ii) कृष्ण के बिना इनको कहीं आश्रय नहीं है –
(iii) मीरा को प्रभु से मिलने की तीव्र यह है –
(iv) मीरा की यह संसार सागर में डूबने वाली है
(i) ये मीरा के प्रतिपालक हैं – कृष्ण
(ii) कृष्ण के बिना इनको कहीं आश्रय नहीं है – मीरा
(iii) मीरा को प्रभु से मिलने की तीव्र यह है – लालसा
(iv) मीरा की यह संसार सागर में डूबने वाली है – नौका
प्रश्न 2
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पद्यांश में आए इस अर्थ के शब्द लिखिए:
(i) दासी
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) दासी – चेरी
(ii) आश्रय – गती (iii) बार-बार – बेर-बेर (iv) नौका – बेरी।
प्रश्न 3
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विधानों के सामने सत्य / असत्य लिखिए: |
(i) हरि बिना मीरा को कहीं आश्रय नहीं है।
(ii) कृष्ण मीरा के पति हैं और वे उनकी पत्नी।
(iii) मीरा बार-बार प्रभु की आरती करती हैं।
(iv) मीरा की जीवन नौका संसार सागर में डूबने वाली है।
(i) सत्य
(i) असत्य
(iii) असत्य
(iv) सत्य।
प्रश्न 4
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आकृति पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
कृति 2: (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
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निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए: |
(i) कूण – …………………..
(ii) रावरी – …………………..
(iii) बेरी – …………………..
(iv) नेरी – …………………..
(i) कूण – कहाँ
(ii) रावरी – आपकी
(iii) बेरी – बेड़ा
(iv) नेरी – पास, निकट।
प्रश्न 2
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निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचान कर लिखिए: (i) पखावज ………………….. (ii) पिचकारी ………………….. (iii) गुलाल ………………….. (iv) चरण …………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) पखावज – स्त्रीलिंग (ii) पिचकारी – स्त्रीलिंग (iii) गुलाल – पुल्लिंग (iv) चरण – पुल्लिंग।
कृति 3: (सरल अर्थ) प्रश्न. पद्यांश क्र. 3 कृति 1: (आकलन)
प्रश्न 1
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पद्यांश में आए इस अर्थ के शब्द लिखिए: बोर्ड की नमूना कृतिपत्रिका |
(i) कमल
(ii) आकाश
(iii) श्रेष्ठ
(iv) संतोष।
(i) कमल – कँवल
(ii) आकाश – अंबर
(iii) श्रेष्ठ – छतीयूँ
(iv) संतोष – संतोख।
प्रश्न 2
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जोड़ियाँ बनाइए:
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) सुर – राग (ii) करताल – झनकार (iii) घट – पट (iv) प्रेम – पिचकार।
प्रश्न 3
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आकृति पूर्ण कीजिए: (i) आकाश लाल हो गया है इससे – (ii) गिरिधर नागर हैं मीरा के ये –
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) आकाश लाल हो गया है इससे – गुलाल से। (ii) गिरिधर नागर हैं मीरा के ये – प्रभु।
प्रश्न 4
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उत्तर लिखिए: (बोर्ड की नमूना कृतिपत्रिका)
Solution & Step-by-Step Answer:
कृति 2: (शब्द संपदा) (बोर्ड की नमूना कृतिपत्रिका) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: कृति 3: (सरल अर्थ) प्रश्न. भाषा अध्ययन (व्याकरण) प्रश्न. 1. शब्द भेद: 2. अव्यय: 3. संधि: 4. सहायक क्रिया: 5. प्रेरणार्थक क्रिया: 6. मुहावरे: अर्थ: बेचैनी अनुभव करना। वाक्य: मालिक की कड़ी बातें सुनकर मुनीम को चैन न मिल पाया। (ii) झेंप जाना। (2) अधोरेखांकित वाक्यांशों के लिए कोष्ठक में दिए गए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए: 7. विरामचिह्न: 8. काल परिवर्तन: 9. वाक्य भेद: (2) निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए: 11. वाक्य शुद्धिकरण: गिरिधर नागर Summary in Hindi गिरिधर नागर कविता का सरल अर्थ 1. मेरे तो गिरधर गोपाल …………………………….. तारो अब मोही।। गिरि को धारण करने वाले, गायों के पालक कृष्ण के सिवा मेरा और कोई नहीं है। जिनके मस्तक पर मोर का मुकुट शोभित है, वे ही मेरे पति हैं। उनके लिए मैंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है। चाहे कोई मुझे कुछ भी कहे। संतों के साथ बैठ-बैठकर मैंने लोकलाज त्याग दी है। मैंने अपने प्रेम रूपी बेल को अपने अश्रु रूपी जल से सींच-सींचकर बड़ा किया है। अब तो यह प्रेम-बेल फैल गई है और इसमें आनंद रूपी फल लगने लगा है। मैंने दूध जमाने के पात्र में जमे दही को मथानी से बड़े प्रेम से बिलोया और उसमें से कृष्ण-प्रेम रूपी मक्खन को निकाल लिया। शेष छाछ रूपी निस्सार जगत को छोड़ दिया। कृष्ण-भक्तों को देखकर मैं प्रसन्न होती हूँ, परंतु संसार का व्यवहार देख मुझे दुख होता है और मैं रो पड़ती हूँ। हे गिरधरलाल, मीरा तो आपकी दासी है, उसे इस संसार रूपी भव-सागर से पार लगाओ। 2. हरि बिन कूण गती मेरी …………………………….. मैं सरण हूँ तेरी।। हे हरि, आपके बिना मेरा कौन है? अर्थात आपके सिवा मेरा कोई ठिकाना नहीं है। आप ही मेरा पालन करने वाले हैं और मैं आपकी दासी हूँ। मैं रात-दिन, हर समय आपका ही नाम जपती रहती हूँ। मैं बार-बार आपको पुकारती हूँ, क्योंकि मुझे आपके दर्शनों की तीव्र लालसा है। यह संसार विभिन्न प्रकार के दोषों और विकारों से भरा हुआ सागर है, जिसके बीच में घिर गई हैं। इस संसार रूपी सागर में मेरी नाव टूट गई है। हे प्रभु, आप शीघ्र इस नाव का पाल बाँधिए, अन्यथा यह जीवन-नौका इस संसार-सागर में डूब जाएगी। हे प्रियतम, आपकी यह विरहिणी निरंतर आपकी बाट जोहती रहती है। आपके आगमन की प्रतीक्षा करती रहती है। आपकी यह दासी मीरा सदा आपके नाम का स्मरण करती रहती है और आपकी शरण में आई है। 3. फागुन के दिन चार …………………………….. चरण कँवल बलिहार रे।। हे मेरे मन, फागुन मास में होली खेलने का समय अति अल्प होता है। अतः तू जी भरकर होली खेल। अर्थात मानव जीनव अस्थायी है, : इसलिए भगवान कृष्ण से पूर्ण रूप से प्रेम कर ले। जिस प्रकार होली के : उत्सव में नाच आदि का आयोजन होता है, उसी प्रकार कृष्ण-प्रेम में मुझे ऐसा प्रतीत होता है मानो करताल, पखावज आदि बाजे बज रहे हैं और अनहद नाद का स्वर सुनाई दे रहा है, जिससे मेरा हृदय बिना स्वर और राग के अनेक रागों का आलाप करता रहता है। मेरा रोम-रोम भगवान कृष्ण के प्रेम के रंग में डूबा रहता है। मैंने अपने प्रिय से होली खेलने के लिए शील और संतोष रूपी केसर का रंग घोला है। मेरा प्रिय-प्रेम ही होली खेलने की पिचकारी है। उड़ते हुए गुलाल से सारा आकाश लाल हो गया है। अब मुझे लोक-लज्जा का कोई डर नहीं है, इसलिए मैंने हृदय रूपी घर के दरवाजे खोल दिए हैं। अंत में मीरा कहती हैं कि मेरे स्वामी गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले कृष्ण भगवान हैं। मैंने उनके चरण-कमलों में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है। गिरिधर नागर विषय-प्रवेश : प्रस्तुत काव्य में रसिक शिरोमणि श्रीकृष्ण की अनन्य उपासिका मीराबाई अपना प्रेम प्रकट कर रही हैं। सभी पदों में | श्रीकृष्ण के प्रति मीराबाई के प्रेम, उनकी भक्ति, उत्सुकता, प्रिय-मिलन की आशा, प्रतीक्षा आदि का मार्मिक चित्रण है। |









