Maharashtra State Board Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा
Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा Textbook Questions and Answers
कृति
कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :




3. पसंद की पंक्ति → चाहे सभी सुमन बिक जाएँ,
चाहे ये उपवन बिक जाएँ
चाहे सौ फागुन बिक जाएँ
पर मैं गंध नहीं बेचूंगा।
4. पंक्तियाँ पसंद होने का कारण → इन पक्तियों में फूल हर हालत में जीवन में अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि मानता है। इसके लिए उसे कोई भी त्याग करना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार है, पर वह अपने स्वाभिमान को हर हालत में बनाए रखना चाहता है।
5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा → प्रस्तुत रचना से यह संदेश मिलता है कि स्वाभिमान मनुष्य की सबसे बड़ी थाती है। हमें हर हालत में इसकी रक्षा करनी चाहिए। यदि स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमें अपना सर्वस्व निछावर कर देना पड़े, तो भी हँसते-हँसते अपना सब कुछ त्याग देना चाहिए। प्रस्तुत पंक्तियों से हमें यही प्रेरणा मिलती है। (विद्यार्थी अपनी पसंदीदा पंक्ति लिखें।)
Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा Additional Important Questions and Answers
पद्यांश क्र. 1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
कृति 1 : (आकलन)



कृति 2 : (शब्द संपदा)
कृति 3 : (सरल अर्थ)
प्रश्न.
उपर्युक्त पद्यांश की ‘जिस डाली ने ——— रिश्ते जोड़े’ पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
फूल कहता है कि पौधे की जिस डाल ने उसे अपनी गोद में खिलाया था, जिन कोंपलों ने उसे लालिमा प्रदान की थी और जिन काँटों ने लक्ष्मणजी की तरह पहरा देकर उसे तोड़े जाने से बचाया था, उन्हें वह कभी भूल नहीं सकता। उनका वह ऋणी है और उस पर पहला अधिकार इन्हीं का है। वे चाहे उसे नोचें या तोड़ें, वह उफ तक नहीं करेगा। वह कहता है कि वे चाहे मुझे तोड़कर किसी मालिन को दे दें, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
पद्यांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
कृति 1: (आकलन)
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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कारण लिखिए : (i) पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा –
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा – फूल को कृत्रिम फुहारों की कामना नहीं है। इसलिए पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा।
प्रश्न 3
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आकृति पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
कृति 2 : (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
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पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए : (i) ……………………………… (ii) ……………………………… (iii) ……………………………… (iv) ………………………………
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) आएगा-जाएगा (ii) रोना-धोना (iii) जादू-टोना (iv) पल-पल।
प्रश्न 2
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निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए : (i) भौंरा = ……………………………… (ii) सुर = ……………………………… (iii) दाम = ……………………………… (iv) कोमल = ………………………………
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) भौंरा = भ्रमर (ii) सुर = स्वर (iii) दाम = मूल्य (iv) कोमल = मुलायम।
कृति 3 : (सरल अर्थ) प्रश्न. पयांश क्र. 3 कृति 1 : (आकलन)
प्रश्न 1
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दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए, जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों : (i) मन ने (ii) पवन के।
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) तन पर किसने प्रतिबंध लगा दिया? (ii) फूल एक-एक के घर किसके साथ जाएगा?
प्रश्न 2
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लिखिए : (i) फूल झर जाना चाहता है ……………………………|
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) फूल झर जाना चाहता है – अपनी माटी में।
प्रश्न 3
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आकृति पूर्ण कीजिए : (i) फूल इस तरह झर जाएगा (ii) भूल-चूक की माफी यह लेगी – (iii) तब मंडी यह समझेगी – (iv) इसको इसका अंत पता है –
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) फूल इस तरह झर जाएगा – पंखुरी-पंखुरी गिरकर (ii) भूल-चूक की माफी यह लेगी – फूल की गंध कुमारी (iii) तब मंडी यह समझेगी – खुद्दारी किसको कहते हैं। (iv) इसको इसका अंत पता है – फूल को अपना
कृति 2 : (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
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पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए : (i) …………………………………. (ii) ………………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) एक-एक (ii) भूल-चूक।
प्रश्न 2
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निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए : (i) पवन = …………………………………. (ii) तन = …………………………………. (iii) घर = …………………………………. (iv) दिन = ………………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) पवन = हवा (ii) तन = शरीर (iii) घर = मकान (iv) दिन = दिवस।
कृति 3 : (सरल अर्थ) प्रश्न. फूल कहता है कि उस दिन बाजार और बाजार में खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि खुद्दारी अर्थात स्वाभिमान क्या होता है और इसके सम्मान के लिए लोग हर प्रकार का त्याग करने के लिए क्यों तत्पर रहते हैं। भाषा अध्ययन (व्याकरण) प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : 1. शब्द भेद : 2. अव्यय : 3. संधि :
उत्तर:
4. सहायक क्रिया : 5. प्रेरणार्थक क्रिया : 6. मुहावरे :
प्रश्न 1
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निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए : (i) चैन न मिलना (ii) झेंप जाना। उत्तर : (i) चैन न मिलना। अर्थ : बेचैनी अनुभव करना। वाक्य : इलाके में चोरी की बढ़ती घटनाओं से पुलिस को चैन नहीं मिल रहा था। (ii) झेंप जाना। अर्थ : लज्जित होना, शरमाना। वाक्य : हिसाब-किताब में गड़बड़ी पकड़े जाने पर मुंशी जी झेंप गए। |
प्रश्न 2
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अधोरेखांकित वाक्यांशों के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए : (थर-थर काँपना, नजर आना, दृष्टि फेरना) (i) चोर पुलिस के डर से बहुत अधिक काँप रहा था। (ii) आगरा के किले की ऊपरी मंजिल से ताजम
Solution & Step-by-Step Answer:
का गुंबद दिखाई देता है।
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) चोर पुलिस के डर से थर-थर काँप रहा था। (ii) आगरा के किले की ऊपरी मंजिल से ताजमहल का गुंबद नजर आता है।
7. कारक: 8. विरामचिह्न : 9. काल परिवर्तन : 10. वाक्य भेद :
11. वाक्य शुद्धिकरण : अपनी गंध नहीं बेचूँगा Summary in Hindi विषय-प्रवेश : अपनी गंध नहीं बेचूँगा कविता का सरल अर्थ 1. चाहे सभी सुमन …………………………. सौगंध नहीं बेचूंगा। स्वाभिमानी फूल अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार है, पर वह किसी भी हालत में अपने स्वाभिमान पर आँच नहीं आने देना चाहता। वह कहता है कि चाहे सारे फूल बिक जाएँ, केवल फूल ही नहीं चाहे वे उपवन भी बिक जाएँ, जहाँ सारे फूल उत्पन्न होते हैं। सारी बहार क्यों न बिक जाए, पर वह अपनी सुगंध को, जिसे वह अपना स्वाभिमान मानता है, किसी भी हालत में नहीं बेच सकता। जिस तरह मनुष्य अपने स्वाभिमान के लिए मर मिट जाता है, पर उस पर आँच नहीं आने देता, उसी तरह यह फूल भी अपनी सुगंध की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। फूल कहता है कि पौधे की जिस डाल ने उसे अपनी गोद में खिलाया था, जिन कोंपलों ने उसे लालिमा प्रदान की थी और जिन काँटों ने लक्ष्मणजी की तरह पहरा देकर उसे तोड़े जाने से बचाया था, उन्हें वह कभी भूल नहीं सकता। उनका वह ऋणी है और उस पर पहला अधिकार इन्हीं का है। वे चाहे उसे नोचें या तोड़ें, वह उफ तक नहीं करेगा। वह कहता है कि वे चाहे मुझे तोड़कर किसी मालिन को दे दें, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है। वह चारों ओर से अपने ऊपर नजरें गड़ाने वालों और उसकी कीमत लगाकर उसे बाजार में बेचने वालों से कहता है कि उसने अपनी सुगंध को न बेचने की जो सौगंध खाई है, वह उसका संस्कार बन गई है और वह उसका सौदा कभी नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता। 2. मौसम से क्या लेना अनुबंध नहीं बेचूंगा। फूल कहता है कि मौसम, कैसा भी हो, मौसम का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।वह हर स्थिति में अपने आप को स्थिर रखने में सक्षम है। उसे किसी से कुछ भी पाने की आकांक्षा नहीं है। वह लाभ या हानि की कोई परवाह नहीं करता। न उस पर किसी चीज का कोई प्रभाव पड़ता है। और न वह किसी चीज से कभी घबराता है। चाहे उसकी कोमल-कोमल पंखुड़ियों पर भौंरों के गुंजन का सरगम सुनाई देता हो अथवा पतझड़ का मौसम हो, और वह मुरझाई हुई दशा में हो या उस पर कृत्रिम फुहारें डालकर उसे सांत्वना दी जाए, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वह अपनी बोली लगाने वालों और पल-पल अपनी कीमतें आँकने वालों को संबोधित करते हुए कहता है कि मैंने अपने आप से अपने स्वाभिमान का अनुबंध कर लिया है और यह ठान लिया है कि मैं अपने स्वाभिमान पर कभी आँच नहीं आने दूँगा। मैं उस अनुबंध को किसी भी हालत में दाँव पर नहीं लगा सकता अर्थात मैं उसका कभी सौदा नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता। 3. मुझको मेरा अंत ……………………… वो प्रतिबंध नहीं बेचूंगा। फूल कहता है कि इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, एक-न-एक दिन उसका अंत होना (मरना) निश्चित है। वह कहता है कि यह बात मुझे अच्छी तरह मालूम है कि एक दिन मैं भी पंखुड़ीपंखुड़ी करके झर जाऊँगा और मेरा अंत हो जाएगा। पर इसके पहले मैं हवा के साथ उड़कर वातावरण में फैलकर एक-एक (फूल) के पास जाऊँगा और मेरी सुगंध उनसे जाने-अनजाने में किए की माफी मांगेगी। फूल कहता है कि उस दिन बाजार और बाजार में खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि खुद्दारी अर्थात स्वाभिमान क्या होता है और इसके सम्मान के लिए लोग हर प्रकार का त्याग करने के लिए क्यों तत्पर रहते हैं। फूल कहता है कि किसी के हाथों बिकने से तो अच्छा है कि मैं मर जाऊँ और अपने देश की मिट्टी में मिल जाऊँ। वह कहता है कि मैंने अपनी इच्छा से अपने शरीर पर जो प्रतिबंध लगा लिया है, उस प्रतिबंध को मैं कभी नहीं बेच सकता। (फूल के इस स्वाभिमान को मनुष्य को भी अपनाना चाहिए और उसे भी किसी लालच में आकर कभी अपना स्वाभिमान बेचना नहीं चाहिए।) |


