Maharashtra State Board 11th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 प्रेरणा
11th HindiDigestChapter 1 प्रेरणा Textbook Questions and Answers
कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर
आकलन
1. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
प्रश्न अ.
कारण लिखिए –
(a) माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है –
उत्तर :
माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है क्योंकि उसकी ममता आँसुओं के रूप में फूट पड़ती है।
(b) बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है –
उत्तर :
बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है क्योंकि माता-पिता पर काम पर जाने की मजबूरी है।
(c) कवि की उम्र बढ़ती ही नहीं है –
उत्तर :
कवि की उम्र बढ़ती ही नहीं है क्योंकि उसने अपनी आँखों में स्वयं को एक बालक के रूप में पाया।
प्रश्न आ.
लिखिए –
(a)
उत्तर :


काव्य सौंदर्य
2.
प्रश्न अ.
ममत्व का भाव प्रकट करने वाली कोई भी एक त्रिवेणी ढूँढ़कर उसका अर्थ लिखिए।
उत्तर :
‘माँ मेरी बे-वजह ही रोती है
फोन पर जब भी बात होती है
फोन रखने पर मैं भी रोता हूँ।’
प्रस्तुत त्रिवेणी में ममत्व का भाव प्रकट हुआ है। जब कभी कवि अपनी माँ को फोन करता है तब पुत्र की आवाज सुनकर माँ की ममता रो पड़ती है। कवि भले ही इसे बे-वजह रोना कहता है, परंतु सच्चाई तो यही है कि कवि भी फोन रखने के बाद रोता है क्योंकि माता और पुत्र दोनों एक-दूसरे के स्नेह के लिए तरसते हैं और उनका एक-दूसरे के प्रति स्नेह आँसुओं के रूप में आँखों से बहने लगता है।
प्रश्न आ.
निम्न पंक्तियों में से प्रतीकात्मक पंक्ति छाँटकर उसे स्पष्ट कीजिए –
(a) चलते-चलते जो कभी गिर जाओ
(b) रात की कोख ही से सुबह जनम लेती है
(c) अपनी आँखों में जब भी देखा है
उत्तर :
‘रात की कोख से सुबह जनम लेती है’ यह पंक्ति प्रतीकात्मक (symbolic) पंक्ति है। यहाँ रात दुख एवं अँधेरे का प्रतीक है और सुबह सुख एवं उजाले का प्रतीक है। सुख और दुख का आना-जाना दिन और रात के समान है। दोनों स्थायी रूप से जीवन में कभी नहीं रहते। जैसे रात के बाद दिन का आना निश्चित है वैसे ही दुख के बाद सुख का आना भी निश्चित है। अत: दुखसुख दोनों का सहर्ष (readily) स्वागत करते हुए जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।
अभिव्यक्ति
3.
प्रश्न अ.
पालनाघर की आवश्यकता पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
आज कामकाजी महिलाओं को घर से बाहर जाना पड़ता है और यह समय की माँग भी है कि पति-पत्नी दोनों अपने परिवार नैया की पतवार सँभालें। ऐसी स्थिति में इनके छोटे बच्चों को परेशानी होती है। कभी-कभी इसका परिणाम इनके कार्य पर भी पड़ता है। ऐसे में कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए पालनाघर की सुविधा आवश्यक है। पालनाघर में बच्चों को घर जैसी देखरेख और सुरक्षा मिलती है।
अगर पालनाघर में बच्चे को घर जैसा माहौल मिलता हो तो महिलाएँ निश्चित होकर आत्मनिर्भर बनने के लिए कदम उठा पाती हैं। भारत की आधी आबादी महिलाओं की है। अत: महिलाएँ अगर श्रम में योगदान दें तो भारत का विकास तेजी से होगा। पालनाघर की सुविधा मुहैया कराने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास पर इसका असर अवश्य दिखाई देगा। उन्हें बच्चों की देखभाल करने के लिए काम छोड़ने की नौबत नहीं आएगी।
घरेलु आमदनी में भी इजाफा (increase) होगा। परिणामत: बच्चों की सेहत और शिक्षा में भी सुधार होगा। संक्षेप में महिलाओं का काम करना महत्त्वपूर्ण है ताकि उन्हें अलग पहचान मिले और इसके लिए पालनाघर की सुविधा अगर उनके कार्य-स्थल के आस-पास हो तो सोने पे सुहागा हो सकता है।
प्रश्न आ.
नौकरीपेशा अभिभावकों के बच्चों के पालन की समस्या पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
आजकल माता-पिता दोनों का नौकरी करना बहुत ही आम बात है। ऐसे में उनके बच्चों के पालन की समस्या उभर आती है। बच्चों की तरफ पूरा-पूरा ध्यान दे पाना उनके लिए मुश्किल होता है। नौकरी और बच्चों का लालन-पालन दोनों में संतुलन बनाना कठिन हो जाता है।
बच्चों की परवरिश उनके लिए एक समस्या बन जाती है। वास्तव में कामकाजी माता-पिता के पास अक्सर समय की कमी होती है। समय का उचित नियोजन करके इस समस्या से निजात (escape) पाया जा सकता है। अपने छोटे-छोटे कार्यों में बच्चों को सम्मिलित कर लेने से बच्चों को भी अहमियत मिल जाती है और बच्चे जिम्मेदार भी बन जाते हैं। घर का समय बच्चों को देकर उन्हें खुश रखा जा सकता है।
उन्हें अच्छी आदतें सिखाने का समय मिल जाता है। माता-पिता के जीवन में बच्चे महत्त्वपूर्ण हैं इस बात का एहसास दिलाया जा सकता है। अक्सर कामकाजी माता-पिता के बच्चों के मन में यह भावना पनपती (flourish) रहती है कि माता-पिता के लिए काम ही महत्त्वपूर्ण है और वे बच्चों से प्यार नहीं करते। कई बार दफ्तर की परेशानियाँ घर तक ले आते हैं और अपना क्रोध वे बच्चों पर निकाल देते हैं।
ऐसे में डर के कारण बच्चे अभिभावकों से दूर हो जाते हैं। इस स्थिति से बचने की कोशिश अभिभावक अवश्य करें। बच्चों की बातें चाव से सुनना, दफ्तर की बातें उन्हें बताना, साथ में भोजन करना, छुट्टी के दिन घूमने ले जाना जैसी छोटी-छोटी बातें भी कामकाजी अभिभावक और बच्चों का रिश्ता मजबूत करती हैं। इस प्रकार समस्या हैं तो उसके उपाय भी है जिन पर अवश्य अमल करना चाहिए।
रसास्वादन
4. आधुनिक जीवन शैली के कारण निर्मित समस्याओं से जूझने की प्रेरणा इन त्रिवेणियों से मिलती है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(i) शीर्षक : प्रेरणा
(ii) रचनाकार : त्रिपुरारि
(iii) केंद्रीय कल्पना : अर्थ प्रधान एवं अतिव्यस्त आधुनिक जीवन शैली अपनाने के कारण आज मनुष्य न चाहते हुए भी अकेला पड़ गया है। तनाव में जी रहा है। मानसिक असंतुलन, चिंता, उदासी, सूनापन आदि से चारों ओर से घिरा है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में आगे निकलने की होड़ लगी हैं और उसके रिश्ते पीछे छूट रहे हैं। जिंदगी की आपाधापी में जुटे माता-पिता के बच्चों को स्नेह भी टुकड़ों में मिलता है।
जीवन की इन समस्याओं को उजागर करते हुए त्रिपुरारि जी ने अपनी त्रिवेणियों में माँ के ममत्व और पिता की गरिमा को भी व्यक्त किया है। जीवन में आगे निकलने की होड़ में चोट खाकर गिरने पर भी सँभलकर फिर से चलने की, आगे बढ़ने की सलाह दी है।
(iv) रस-अलंकार : तीन पंक्तियों के मुक्त छंद में इस कविता की त्रिवेणियाँ लिखी हुई हैं।
(v) प्रतीक विधान : जीवन के प्रति सकारात्मकता का विधान है – पेड़ में बीज और बीज में पेड़ छुपा है। यहाँ बीज हमारी भावनाओं का प्रतीक है और उसे आँसुओं के जल से सींचकर खुशियों का वृक्ष फलता फूलता है।
(vi) कल्पना : खुद के भीतर छिपे बालक को जीवित रखने की कल्पना हमें तनाव, कुंठा से मुक्ति देगी।
(vii) पंसद की पंक्तियाँ तथा प्रभाव :
‘चाहे कितनी ही मुश्किलें आएँ
छोड़ना मत उम्मीद का दामन
नाउम्मीदी तो मौत है प्यारे।’
यह त्रिवेणी मुझे पसंद है क्योंकि सचमुच कठिनाइयों से घबराकर निराश व्यक्ति जीते जी मर जाता है। हर अंधेरी काली रात के बाद सुबह उजाला लेकर अवश्य आता है। ठीक इसी तरह दुख के बाद सुख का आना निश्चित है इस उम्मीद के साथ जीना चाहिए। यही जीवन के प्रति सकारात्मकता है।
(viii) कविता पसंद आने के कारण : सामयिक स्थितियाँ, रिश्ते और जीवन के प्रति सकारात्मकता कविता का मुख्य विषय है जो प्रेरणादायी है। त्रिपुरारि जी की ये त्रिवेणियाँ हमें जीने की कला सिखाती है, इसीलिए मुझे कविता पसंद है।
साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान
5. जानकारी दीजिए:
प्रश्न अ.
त्रिवेणी’ काव्य प्रकार की विशेषताएँ –
(a) ……………………………………………..
(b) ……………………………………………..
उत्तर :
(a) तीन पंक्तियों का मुक्त छंद है।
(b) मात्र तीन पंक्तियों में कल्पना और यथार्थ (reality) की अभिव्यक्ति (expression) होती है।
प्रश्न आ.
त्रिपुरारि जी की अन्य रचनाएँ –
(a) ……………………………………………..
(b) ……………………………………………..
उत्तर :
(a) नींद की नदी (कविता संग्रह)
(b) नॉर्थ कैंपस (कहानी संग्रह)
रस
काव्यशास्त्र में आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा माना है। विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) भाव और स्थायी भाव रस के अंग हैं और इन अंगों अर्थात तत्त्वों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
साहित्यशास्त्र में नौ प्रकार के रस माने गए हैं। कालांतर में अन्य दो रसों को सम्मिलित किया गया है।
रस | स्थायी भाव |
(१) शृंगार | प्रेम |
(७) भयानक | भय |
(२) शांत | शांति |
(८) बीभत्स | घृणा |
(३) करुण | शोक |
(९) अद्भुत | आश्चर्य |
(४) हास्य | हास |
(१०) वात्सल्य | ममत्व |
(५) वीर | उत्साह |
(११) भक्ति | भक्ति |
(६) रौद्र | क्रोध |
करुण रस :
किसी प्रियजन या इष्ट के कष्ट, शोक, दुख, मृत्युजनित प्रसंग के कारण अथवा किसी प्रकार की अनिष्ट आशंका के फलस्वरूप हृदय में पीड़ा या क्षोभ का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ करुण रस की अभिव्यंजना होती है।
उदा. –
(१) वह आता –
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।
पेट – पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
– मैथिलीशरण गुप्त
(२) अबला जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी,
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।
चल रहा लकुटिया टेक
मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को,
मुँह फटी झोली फैलाता।
– सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
Yuvakbharati Hindi 11th Textbook SolutionsChapter 1 प्रेरणा Additional Important Questions and Answers
कृतिपत्रिका
(अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
पद्यांश : माँ मेरी बे-वजह ………………………………………… टुकड़ों में मिले हैं माँ-बाप (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 1) |
(i) माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है –
उत्तर :
माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है क्योंकि उसकी ममता आँसुओं के रूप में फूट पड़ती है।
(ii) बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है –
उत्तर :
बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है क्योंकि माता-पिता पर काम पर जाने की मजबूरी है।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
पर्यायवाची शब्द लिखिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
: (i) माँ = …………………………., …………………………. उत्तर : जननी, माता, धात्री
|
(ii) रात = …………………………., ………………………….
उत्तर :
रजनी, निशा, यामिनी
प्रश्न 3
Maharashtra Board Solution
पद्यांश की द्वितीय त्रिवेणी का भावार्थ लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: प्रस्तुत पद्यांश कवि त्रिपुरारि जी लिखित त्रिवेणी संग्रह ‘साँस के सिक्के’ से लिया गया है। इस त्रिवेणी में पिता की गरिमा व्यक्त करते हुए कवि कह रहे हैं कि पिता को कठोर हृदय का समझने की भूल हम सब करते हैं। परंतु सच्चाई यही है कि वह ऊपर से जितने सख्त नजर आते हैं भीतर से उतने ही कोमल होते हैं।
|
जब संतान को चोट लगती है तो पिता का कोमल हृदय भी तड़प उठता है। हर पिता में इस तरह कोई माँ भी छुपी होती है अर्थात पिता भी अपनी संतान से उतना ही प्यार करता है, जितना कि एक माँ। दोनों के स्नेह में कोई तुलना नहीं होनी चाहिए।
(आ) निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
पद्यांश : चाहे कितना भी हो घनघोर अंधेरा ……………………………………………… जहाँ पर भी कदम रखोगे। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 2) |
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
परिणाम लिखिए : |
(i) अँधेरा होने पर भी आस रखने का परिणाम
अँधेरा होने पर भी आस रखने से किसी दिन उजाला अवश्य होता है।
(i) एक ही दीप से आगाज-ए-सफर कर लेने का परिणाम –
उत्तर :
एक ही दीप से आगाज-ए-सफर कर लेने से जहाँ भी कदम रखते हैं वहाँ रोशनी हो जाती है।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
पद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ियाँ ढूँढ़कर लिखिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
: (i) …………………………… x …………………………… अंधेरा x उजाला x …….
|
(ii) …………………………… x ……………………………
पास x दूर
प्रश्न 3
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पद्यांश की किसी एक त्रिवेणी का काव्य सौंदर्य लिखिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
: प्रस्तुत पद्यांश ‘प्रेरणा’ कविता से लिया गया है। कवि त्रिपुरारि जी लिखित साँस के सिक्के ‘त्रिवेणी संग्रह’ में ये त्रिवेणियाँ संकलित (consalidated) हैं। दिए गए पद्यांश की द्वितीय त्रिवेणी में वीर रस की निर्मिति (build up) हुई है। प्राप्त परिस्थितियों में भी उत्साह के साथ आगे बढ़ने की कोशिश यहाँ दिखाई देती है। अपनी आयु के कुछ पल उधार लेकर ही सही हसरत के बीज बोने का साहस करके सपनों को साकार करने की बात वीरतापूर्ण है। निराशा के बादलों के बीच आशा का संचार इस त्रिवेणी की विशेषता है।
|
(इ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
पद्यांश : अपनी आँखों में जब भी …………………………………………….. नाउम्मीदी तो मौत है प्यारे। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 2) |
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
उचित जोड़ियाँ मिलाइए : |

‘अ’ | ‘आ’ |
(1) …………………………… | …………………………… |
(2) …………………………… | …………………………… |
(3) …………………………… | …………………………… |
(4) …………………………… | …………………………… |
