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Class 12 (HSC Board)Hindi (Yuvakbharati)2026-27 Syllabus

Chapter 2 निराला भाई Solutions

Complete Maharashtra State Board Balbharati & Yuvakbharati textbook solutions for Chapter 2 निराला भाई. Step-by-step solved exercises, numerical problems, and digest answers.

35 Solved Questions18 Diagrams4453 words

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 2 निराला भाई

12th Hindi Guide Chapter 2 निराला भाई Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

आकलन

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
लिखिए :

(अ) लेखिका के पास रखे तीन सौ रुपये इस प्रकार समाप्त हो गए :
(1) ……………………………………………
(2) …………………………………………..
(3) ……………………………………………
(4) ……………………………………………

Solution & Step-by-Step Answer:
:
लेखिका के पास रखे तीन सौ रुपए इस प्रकार समाप्त हो गए –
(1) किसी विद्यार्थी का परीक्षा शुल्क देने के लिए 50 रुपए लिए।
(2) किसी साहित्यिक मित्र को देने के लिए 60 रुपए लिए।
(3) तांगेवाले की माँ को मनीआर्डर करने के लिए 40 रुपए लिए।
(4) दिवंगत मित्र की भतीजी के विवाह के लिए 100 रुपए लिए। तीसरे दिन जमा पैसे समाप्त।

(आ) अतिथि की सुविधा हेतु निराला जी ये चीजें ले आए :
(1) ……………………………………………
(2) ……………………………………………
(3) ……………………………………………
(4) ……………………………………………
उत्तर :
अतिथि की सुविधा हेतु निराला जी ये चीजें ले आए –
(1) नया घड़ा खरीदकर लाए।
(2) उसमें गंगाजल भर लाए।
(3) धोती।
(4) चादर।

शब्द संपदा

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
निम्न शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए : (1) प्रहरी – …………………………………………… (2) अतिथि – …………………………………………… (3) प्रयास – …………………………………………… (4) स्मृति – ……………………………………………
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) प्रहरी = द्वारपाल (2) अतिथि = मेहमान (3) प्रयास = प्रयत्न (4) स्मृति = याद

अभिव्यक्ति

प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
(अ) ‘भाई-बहन का रिश्ता अनूठा होता है, इस विषय पर अपना मत लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: एक माता से उत्पन्न भाइयों अथवा भाई-बहनों का रिश्ता निराला होता है। यह रिश्ता अटूट होता है। बचपन में वे साथ-साथ खेलते, बढ़ते और पढ़ते हैं। जीवन में घटने वाली अनेक अच्छी बुरी घटनाओं के साक्षी होते हैं। बड़े होने पर बहन की शादी हो जाने पर उसका नया घर बस जाता है। फिर भी उसका लगाव अपने मायके के परिवार के साथ बना रहता है। जब भी पीहर आने का कोई मौका आता है, वह उसे कभी गँवाना नहीं चाहती।

पीहर में आकर उसे जो खुशी मिलती है, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। रक्षाबंधन के त्योहार पर वह कहीं भी हो, अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधने और उसकी आरती उतारने जरूर पहुँचती है। भाई-बहन का यह मिलन अनूठा होता है। भाई भी इस अवसर पर उसे अपनी क्षमता के अनुसार अच्छे-से-अच्छा उपहार देने से नहीं चूकता। यह उनके अटूट प्यार और अनूठे रिश्ते का ही प्रमाण है।

(आ) ‘सभी का आदरपात्र बनने के लिए व्यक्ति का सहृदयी और संस्कारशील होना आवश्यक है’, इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अपने परिवार और समाज में सबके साथ हिल-मिल कर रहना चाहता है। उसे सबके दुख-सुख में शामिल होना अच्छा लगता है। जीवों पर दया करना और मन में करुणा के भाव उत्पन्न होना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। ऐसे व्यक्ति संस्कारशील कहलाते हैं।

ऐसे व्यक्ति का सभी लोग आदर करते हैं और उसे अपना प्यार देते हैं। मगर सब लोग ऐसे नहीं होते। कुछ लोग विभिन्न कारणों से समाज से कटे-कटे रहते हैं और ‘अपनी डफली अपना राग’ विचार वाले होते हैं। वे अपने घमंड में चूर रहते हैं और किसी अन्य की परवाह नहीं करते।

ऐसे लोगों को समाज तो क्या कोई भी पसंद नहीं करता। ऐसे लोगों को समाज में सम्मान नहीं मिलता। इसलिए मनुष्य को सहृदयी और संस्कारशील होना जरूरी है।

पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न –

प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
(अ) निराला जी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: निराला जी मानवता के पुजारी थे। उनमें मानवीय गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। उन्हें स्वयं से अधिक दूसरों की अधिक चिंता होती थी। खुद निर्धनता में जीवन बिताते रहे, पर दूसरों के आर्थिक दुखों का भार उठाने के लिए सदा तत्पर रहते थे। आतिथ्य करने में उनका जवाब नहीं था।

अतिथियों को सदा हाथ पर लिये रहते थे। उनके लिए खुद भोजन बनाने और बर्तन माँजने में उन्हें हर्ष होता था। घर में सामान न होने पर अतिथियों के लिए मित्रों से कुछ चीजें माँग लाने में शर्म नहीं करते थे। उदार इतने थे कि अपने उपयोग की वस्तुएँ भी दूसरों को दे देते थे और खुद कष्ट उठाते थे।

साथी साहित्यकारों के लिए उनके मन में बहुत लगाव था। एक बार कवि सुमित्रानंदन पंत के स्वर्गवास की झूठी खबर सुनकर वे व्यथित हो गए थे और उन्होंने पूरी रात जाग कर बिता दी थी।

निराला जी पुरस्कार में मिले धन का भी अपने लिए उपयोग नहीं करते थे। अपनी अपरिग्रही वृत्ति के कारण उन्हें मधुकरी खाने ३ तक की नौबत भी आई थी। इस बात को वे बड़े निश्छल भाव से बताते थे।

उनका विशाल डील-डौल देखने वालों के हृदय में आतंक पैदा कर देता था, पर उनके मुख की सरल आत्मीयता इसे दूर कर देती थी।

निराला जी से अन्याय सहन नहीं होता था। इसके विरोध में उनका हाथ और उनकी लेखनी दोनों चल जाते थे। निराला जी आचरण से क्रांतिकारी थे। वे किसी चीज का विरोध करते हुए कठिन चोट करते थे। पर उसमें द्वेष की भावना नहीं होती थी। निराला जी के प्रशंसक तथा आलोचक दोनों थे। कुछ लोग जहाँ उनकी नम्र उदारता की प्रशंसा करते थे, वहीं कुछ लोग उनके उद्धत व्यवहार की निंदा करते नहीं थकते थे।

निराला जी अपने युग की विशिष्ट प्रतिभा रहे हैं। उनके सामने अनेक प्रतिकूल परिस्थितियाँ आईं पर वे कभी हार नहीं माने।

(आ) निराला जी का आतिथ्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
निराला जी में आतिथ्य सत्कार का पुराना संस्कार था। वे अतिथि को देवता के समान मानते थे। अपने अतिथि की सुविधा में कोई कसर बाकी नहीं रखते थे। वे अतिथि को अपने कक्ष में ठहराते थे। उसके लिए स्वयं भोजन तैयार करते थे। बर्तन भी वे खुद माँजते थे। अतिथि सत्कार के लिए आवश्यक सामान घर में न होता तो वे अपने हित-मित्रों से माँगकर ले आते थे, पर अतिथि सेवा में कोई कमी नहीं रखते थे। कई बार तो वे कवयित्री महादेवी वर्मा के यहाँ से भोजन बनाने के लिए लकड़ियाँ तथा घी आदि माँगकर ले आए थे।

निराला जी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनका कक्ष भी सुविधाओं से रहित था, पर अतिथि के लिए उनके दिल में अपार श्रद्धा थी। एक बार प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त निराला जी का आतिथ्य ग्रहण करने आए थे। उस समय उन्होंने उनका जो सत्कार किया था वह देखते ही बनता था। निराला जी गुप्त जी के बिछौने का बंडल खुद बगल में दबाकर और दियासलाई की तीली के प्रकाश में तंग सीढ़ियों का मार्ग दिखाते हुए उन्हें अपने कक्ष में ले गए थे।

कक्ष प्रकाश और सुख सुविधा से रहित था, पर निराला जी की विशाल आत्मीयता से भरा हुआ था। वे गुप्त जी की सुविधा के लिए नया घड़ा खरीदकर उसमें गंगाजल ले आए। घर में धोती-चादर जो कुछ मिल सका सब तख्त पर बिछा कर गुप्त जी को प्रतिष्ठित किया था। निराला जी का आतिथ्य भाव अपनी किस्म का निराला था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान

प्रश्न 5 Maharashtra Board Solution
(अ) ‘निराला’ जी का मूल नाम – [ ] (आ) हिंदी के कुछ आलोचकों द्वारा महादेवी वर्मा को दी गई उपाधि – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
: (अ) निराला जी का मूल नाम – सूर्यकांत त्रिपाठी। (आ) कुछ हिंदी आलोचकों द्वारा महादेवी वर्मा को दी गई उपाधि – [आधुनिक मीरा]

रस

काव्यशास्त्र में आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा माना है। विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) भाव और स्थायी भाव रस के अंग हैं और इन अंगों अर्थात तत्त्वों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।

साहित्यशास्त्र में नौ प्रकार के रस माने गए हैं। कालांतर में अन्य दो रसों को सम्मिलित किया गया है।
रस – स्थायी भाव – रस – स्थायी भाव

ग्यारहवीं कक्षा की युवकभारती पाठ्यपुस्तक में हमने करुण, हास्य, वीर, भयानक और वात्सल्य रस के लक्षण एवं उदाहरणों का अध्ययन किया है। इस वर्ष हम शेष रसों – रौद्र, बीभत्स, अद्भुत, शृंगार, शांत और भक्ति रस का अध्ययन करेंगे।

रौद्र रस : जहाँ पर किसी के असह्य वचन, अपमानजनक व्यवहार के फलस्वरूप हृदय में क्रोध का भाव उत्पन्न होता है; वहाँ रौद्र रस उत्पन्न होता है। इस रस की अभिव्यंजना अपने किसी प्रिय अथवा श्रद्धेय व्यक्ति के प्रति अपमानजनक, असह्य व्यवहार के प्रतिशोध के रूप में होती है।

उदा. –
(१) श्रीकृष्ण के वचन सुन, अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगे।

(२) कहा – कैकयी ने सक्रोध
दूर हट! दूर हट! निर्बोध!
द्विजिव्हे रस में, विष मत घोल।

बीभत्स रस : जहाँ किसी अप्रिय, अरुचिकर, घृणास्पद वस्तुओं, पदार्थों के प्रसंगों का वर्णन हो, वहाँ बीभत्स रस उत्पन्न होता है।

उदा. –
(१) सिर पर बैठो काग, आँखि दोऊ खात
खींचहि जीभहि सियार अतिहि आनंद उर धारत।
गिद्ध जाँघ के माँस खोदि-खोदि खात, उचारत हैं।
(२) सुडुक, सुडुक घाव से पिल्लू (मवाद) निकाल रहा है,
नासिका से श्वेत पदार्थ निकाल रहा है।

Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 2 निराला भाई Additional Important Questions and Answers

कृतिपत्रिका के प्रश्न 1 (अ) तथा प्रश्न 1 (आ) के लिए)
गद्यांश क्र. 1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए :

(1)

Solution & Step-by-Step Answer:
:

(2)

उत्तर :

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए : निराला जी ने (1) यह रचा – ……………………………….. (2) यह किया – ……………………………….. उत्तर : निराला जी ने (1) यह रचा – दिव्य वर्ण-गंधवाले मधुर गीत। (2) यह किया – बर्तन मांजने, पानी भरने जैसे कठिन काम।

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए : (1) कच्चे x ……………………………….. (2) प्रश्न x ……………………………….. (3) कठिन x ……………………………….. (4) जीवन x ………………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) कच्चे x पक्के (2) प्रश्न – उत्तर (3) कठिन x सरल (4) जीवन x मरण।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए : (1) ……………………………….. (2) ………………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) वर्ण-गंध (2) दिन-रात।

गद्यांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
किसी अन्य का कष्ट दूर करने के लिए लुप्त हो गई वस्तुएँ – (1) ………………………….. (2) …………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: किसी अन्य का कष्ट दूर करने के लिए लुप्त हो गई वस्तुएँ – (1) रजाई (2) कोट।

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए : (1) आदेश = ………………………………. (2) दुष्कर = ………………………………. (3) अंतर्धान = ………………………………. (4) दिवंगत = ……………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) आदेश = हुकम (3) अंतर्धान = अदृश्य (2) दुष्कर = कठिन (4) दिवंगत = मृत।

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘निर्बंध उदारता’ के बारे में अपना मत 40 से 50 शब्दों में व्यक्त किजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है। किसी के दुखदर्द से सहानुभूति रखना अथवा उसकी आर्थिक मदद करना मनुष्य का धर्म है। इससे जरूरतमंद व्यक्ति को राहत और नैतिक सहयोग मिलता है। अनेक संपन्न व्यक्ति एवं बड़ी-बड़ी संस्थाएँ इस प्रकार का सहयोग देने का कार्य करती हैं। कई साधारण व्यक्ति भी अपनी क्षमता के अनुसार अपने जान-पहचान वाले लोगों की मदद करते हैं।

पर सामान्य लोगों के लिए किसी की आर्थिक सहायता करने की एक सीमा होती है। उसे सबसे पहले अपना घर-बार देखना पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक उदारता बरतने लगता है, तो उसकी आर्थिक स्थिति अस्त-व्यस्त हो जाती है। ‘अति’ किसी की अच्छी नहीं होती। हर काम अपनी सीमा में ही फबता है। इसलिए निबंध उदारता अनुचित ही नहीं है, यह किसी की भी आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर सकती है।

गद्यांश क्र. 3
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
लिखिए : निराला जी का कक्ष ऐसा था – (1) …………………………. (2) …………………………. (3) सुख-सुविधाहीन। (4) ………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) निराला जी का कक्ष ऐसा था – (2) कक्ष में जाने का मार्ग तंग सीढ़ियों से होकर था। (3) प्रकाश रहित था। (4) सुख-सुविधाहीन।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
अतिथि के लिए निराला जी माँग लिया करते थे – (1) …………………………. (2) ………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
: अतिथि के लिए निराला जी माँग लिया करते थे (1) लकड़ियाँ (2) थोड़ा घी।
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
अतिथि देवता के लिए निराला जी शौक से ये करते थे- (1) …………………………. (2) ………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
: अतिथि देवता के लिए निराला जी शौक से ये करते थे – (1) अतिथि के लिए भोजन बनाने का काम। (2) उनके जूठे बर्तन माँजना।

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘अतिथि देवो भव’ के बारे में अपने विचार 40 से 50 शब्दों में लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: अतिथियों का स्वागत-सत्कार करना हमारे देश के लोगों के संस्कार का एक अंग रहा है। अतिथि के स्वागत में लोग कोई कसर बाकी नहीं रखते। घर में कोई सामान न हो, तो किसी के यहाँ से माँग-जाँच कर ले आने में भी लोग नहीं हिचकते। पर अतिथि की सेवा करने में कोई कसर नहीं रखते।

सुशील अतिथि मेजबान की क्षमता को ध्यान में रखते हैं और उसके साथ पूरा सहयोग करते हैं। मेजबान की तरफ से कहीं कोई कमी भी रह जाती है तो भी उसके साथ सहयोग करते हैं। ऐसे अतिथि मेजबान के लिए देव स्वरूप होते हैं। पर कुछ अतिथि ऐसे होते हैं, जो मेजबान की तरफ से आवभगत में कहीं कोई कमी रह जाने पर उसकी निंदा करने से भी नहीं चूकते।

कुछ अतिथि ‘मान न मान मैं तेरा मेहमान’ की तरह मेजबान के घर आ धमकते हैं और जाने का नाम ही नहीं लेते। ऐसे अतिथि मेजबान के लिए भार स्वरूप होते हैं। जो अतिथि मेजबान की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखते हैं, वही अतिथि देव स्वरूप होते हैं।

गद्यांश क्र. 4
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए : (a)
Solution & Step-by-Step Answer:
:

(b)

उत्तर :

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
चौखट पूर्ण कीजिए : (1) गेरू में रंगे हुए वस्त्र। (2) शरीर पर इस वस्त्र का अभाव था। – (3) गद्यांश में प्रयुक्त दो वृक्ष। (4) कवि का गैरिक शरीर ऐसा लगता था। –
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) गेरू में रंगे हुए वस्त्र। – [दोनों अधोवस्त्र और उत्तरीय] (2) शरीर पर इस वस्त्र का अभाव था। – [अंगोछा] (3) गद्यांश में प्रयुक्त दो वृक्ष। – [नीम-पीपल] (4) कवि का गैरिक शरीर ऐसा लगता था – [किसी शिखर जैसा।]
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए : कवि के संन्यास से लेखिका को – (1) लाभ – …………………………. (2) हानि – …………………………. उत्तर : कवि के संन्यास से लेखिका को (1) लाभ – साबुन के पैसे बचेंगे। (2) हानि – जाने कहाँ-कहाँ छप्पर डलवाने पड़ेंगे।

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के वचन बदल कर लिखिए : (1) निधियाँ – ……………………….. (2) वस्त्रों – ……………………….. (3) रोटियाँ – ……………………….. (4) पुत्रौं – ………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) निधियाँ – निधि (3) रोटियाँ – रोटी (2) वस्त्रों – वस्त्र (4) पुत्रौं – पुत्र

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘साधु-संन्यासियों से जनता का मोहभंग’ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत व्यक्त कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: एक समय था जब लोग साधु-संतों और संन्यासियों का बड़ा सम्मान करते थे। वे समाज में बड़े सम्मान की दष्टि से देखे जाते थे। वे समाज-सुधार और जनता के हित के कार्य किया करते थे और बदले में जनता से कोई अपेक्षा नहीं करते थे। लेकिन हाल में जब से साधु-संन्यासियों के वेष में कुछ ढोंगी लोगों ने साधुसंन्यासियों की जमात को अपने समाज-विरोधी कार्यों से बदनाम कर दिया है, तब से लोगों को इनसे घृणा हो गई है।

ऐसा नहीं है कि सच्चे साधु-संन्यासी हैं ही नहीं। हैं, लेकिन इन ढोंगी साधु संन्यासियों ने उनकी छबि-धूमिल कर दी है। ढोंगी साधु-संन्यासियों के बीच सच्चे साधु-संन्यासियों को पहचानना मुश्किल हो गया है। साधु-संन्यासियों से जनता का मोहभंग ढोंगी साधु-संन्यासियों की जमात के कारण हुआ है। सच्चे साधु-संन्यासियों की जनता आज भी मुरीद है।

गद्यांश क्र. 5
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई। सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
लिखिए : निराला जी इस दृष्टि से निराले थे – (1) ……………………….. (2) जीवन में ……………………….. (3) ………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: निराला जी इस दृष्टि से निराले थे – (1) अपने शरीर की दृष्टि से। (2) जीवन में। (3) अपने साहित्य की दृष्टि से।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए : (1) देखने वालों के हृदय में इससे आतंक उत्पन्न होता था – (2) सत्य दृष्टा ऐसे होते हैं – (3) अन्याय के प्रतिकार का निराला जी का तरीका – (4) निराला जी की लेखनी की विशेषता – उत्तर : (1) देखने वालों के हृदय में इससे आतंक उत्पन्न होता था – [निराला जी का विशाल डील-डौल देखकर।] (2) सत्यदृष्टा ऐसे होते हैं – [बालकों जैसे सरल और विश्वासी।] (3) अन्याय के प्रतिकार का निराला जी का तरीका – [लेखनी के पहले हाथ उठाना।] (4) निराला जी की लेखनी की विशेषता – [उनकी लेखनी हाथ से अधिक कठोर प्रहार करती थी।]
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
संबंध निरूपित कीजिए : (1) क्रूरता – ……………………….. (2) कायरता – ………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) क्रूरता – वृक्ष की जड़ के अव्यक्त रस में (2) कायरता – वृक्ष के फल के व्यक्त स्वाद में।
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
:

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए : (1) शरीर = ……………………………………… (2) सत्य = ……………………………………… (3) प्रतिकार = ……………………………………… (3) कठोर = ………………………………………
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) शरीर = तन (2) सत्य = सच्चाई (3) प्रतिकार = विरोध (4) कठोर = कड़ा

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘अन्याय सहन करना भी अन्याय है।’ इस विषय पर 40 से 50. शब्दों में अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
: सभी मनुष्य समान हैं। किसी को भी किसी के साथ अन्याय करने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने से कमजोर व्यक्तियों पर अत्याचार करने से नहीं चूकते। कभी किन्हीं कारणों से जिनके साथ अन्याय होता है, वे उसका विरोध भी नहीं कर पाते।

वे समझते हैं कि विरोध करने का परिणाम उल्टा होगा और अत्याचारी उसे और सताने की कोशिश करेगा। लेकिन यह सोच उचित नहीं है। अन्याय का विरोध न करने से अत्याचारी का मन और बढ़ जाता है। वह समझ जाता है कि उसके अत्याचार का विरोध करने की संबंधित व्यक्ति में शक्ति नहीं है।

इसलिए ऐसे लोगों पर अत्याचार करना अपना अधिकार मान लेता है और वह निडर होकर उन पर अत्याचार करता रहता है। इस तरह अत्याचार सहन करना अपने आप पर अन्याय हो जाता मुक्ति मिल सकती है।

गद्यांश क्र. 6 प्रश्न.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए : निराला जी के व्यवहार के बारे में जन-मत – (1) – ………………………………….. (2) – ………………………………….. उत्तर : (1) कोई उनकी उदारता की भूरि-भूरि प्रशंसा करता था। (2) कोई उनके उद्धत व्यवहार की निंदा करते नहीं हारता था।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
संजाल पूर्ण कीजिए :
Solution & Step-by-Step Answer:
:

प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए : (1) निराला अपने युग की यह हैं – ………………………………….. (2) उनके जीवन के चारों ओर यह नहीं है – ………………………………….. (3) उनके लिए परिवार के कोंपल यह बन गए – ………………………………….. (4) आर्थिक कारणों से उन्हें यह नहीं मिली – …………………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) विशिष्ट प्रतिमा (2) परिवार का लौहसार घेरा। (3) पत्नी वियोग के पतझड़। (4) अपनी संतान के प्रति कर्तव्य-निर्वाह की सुविधा।
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
Solution & Step-by-Step Answer:
:

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में प्रयुक्त उपसर्गयुक्त शब्द ढूँढ़ कर लिखिए : (1) ……………………………………. (2) ……………………………………. (3) ……………………………………. (4) …………………………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) असफलता (2) निष्फल (3) सजातीय (4) अभिशाप।

व्याकरण

1. मुहावरे :

• निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(1) आँखों में धूल झोंकना।
अर्थ : धोखा देना।
वाक्य : साइबर क्राइम से अच्छे-अच्छे लोगों की आँखों में धूल झोंककर लाखों रुपए ऐंठ लिए जाते हैं।

(2) आँखें बिछाना।
अर्थ : अति उत्साह से स्वागत करना।
वाक्य : स्वामी जी के दर्शन के लिए श्रद्धालु आँखें बिछाए हुए थे।

(3) कान में कौड़ी डालना।
अर्थ : गुलाम बनाना।
वाक्य : अंग्रेजों ने भारी संख्या में भारतीय मजदूरों के कान में कौड़ी डाल रखा था।

2. काल परिवर्तन :

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों का काल परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए : (1) कौन बहिन हम जैसे भुक्खड़ को भाई बनाएगी। (सामान्य वर्तमानकाल) (2) उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयासों का स्मरण कर मुझे आज भी हँसी आ जाती है। (अपूर्ण भूतकाल) (3) उनकी व्यथा की सघनता जानने का मुझे एक अवसर मिला था। (पूर्ण वर्तमानकाल) (4) पंत के साथ तो रास्ता कम अखरता था, पर अब सोचकर ही थकावट होती है। (सामान्य भविष्यकाल) (5) निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण हैं। (पूर्ण भूतकाल)
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) कौन बहिन हम जैसे भुक्खड़ को भाई बनाती है। (2) उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयासों का स्मरण कर मुझे आज भी हँसी आ रही थी। (3) उनकी व्यथा की सघनता जानने का मुझे एक अवसर मिला है। (4) पंत के साथ तो रास्ता कम अखरता था, पर अब सोचकर ही थकावट होगी। (5) निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण थे।

3. वाक्य शुद्धिकरण :

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके लिखिए : (1) निराला जी अपनी युग के विशिष्ट प्रतिभा हैं। (2) सत्य की मार्ग सरल हैं। (3) मनुष्य जाती की नासमझी की इतिहास क्रूर और लंबा है। (4) निराला जी अपना शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण है। (5) उनके जीवन पर संघर्श के जो आघात हैं, वे उनकी हार के नहीं शक्ती के प्रमाणपत्र हैं।
Solution & Step-by-Step Answer:
: (1) निराला जी अपने युग की विशिष्ट प्रतिभा हैं। (2) सत्य का मार्ग सरल है। (3) मनुष्य जाति की नासमझी का इतिहास क्रूर और लंबा है। (4) निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण हैं। (5) उनके जीवन पर संघर्ष के जो आघात हैं, वे उनकी हार के नहीं शक्ति के प्रमाणपत्र हैं।

निराला भाई Summary in Hindi

निराला भाई लेखक का परिचय

निराला भाई लेखक का नाम :श्रीमती महादेवी वर्मा। (जन्म 26 मार्च, 1907; निधन 1987.)

प्रमुख कृतियाँ :नीहार, रश्मि, नीरजा, दीपशिखा, सांध्यगीत, यामा (कविता संग्रह), अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, मेरा परिवार (रेखाचित्र), श्रृंखला की कड़ियाँ तथा साहित्यकार की आस्था (निबंध)।

विधा :संस्मरण।

विषय प्रवेश :प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ की गणना हिंदी के श्रेष्ठ कवियों में की जाती है। वे हिंदी साहित्य में छायावादी कवि एवं क्रांतिकारी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा एवं निराला जी दोनों का कार्यक्षेत्र प्रयागराज रहा है। इसलिए भी कवयित्री निराला जी को नजदीक से जानती-समझती और उनके व्यक्तित्व से गहराई से परिचित रही हैं।

प्रस्तुत संस्मरण में उन्होंने निराला जी को जिन विभिन्न रूपों में देखा और परखा है, उसे उन्होंने बेबाकी से शब्दांकित किया है। – इस संस्मरण से हमें निराला जी के फक्कड़पन, उनके व्यक्तित्व, उनकी निर्धनता, उदारता, संवेदनशीलता, आतिथ्य सत्कार की भावना तथा पारिवारिक दशा आदि के बारे में अनेक अनछुई बातों की जानकारी मिलती है।

निराला भाई पाठ का सार

कवयित्री महादेवी वर्मा प्रसिद्ध कवि निराला जी के साथ घटित कई घटनाओं की साक्षी रही हैं। उन्होंने उन्हें नजदीक से देखा-समझा है। उन्होंने इस संस्मरण में उनके साथ घटी हुई अनेक घटनाओं और उनके स्वभाव एवं व्यवहार का चित्रण किया है।

निराला जी संवेदनशील उदार, आतिथ्यप्रेमी, सहृदय, फक्कड़ किस्म के और सदा निर्धनता में जीवन बिताने वाले कवि रहे हैं। वे स्पष्टवादी व्यक्ति थे और अपने बारे में सही बात कहने से नहीं चूकते थे। एक बार रक्षाबंधन त्योहार के अवसर पर कवयित्री ने उनकी सूनी कलाइयाँ देखकर इसके बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, “कौन बहन मुझ भुक्खड़ को भाई बनाएगी।”

कवि अपनी उदारता और दूसरों का दुख दूर करने की प्रवृत्ति के कारण सदा तंगी में रहे। वे खुद कष्ट सह लेते थे पर दूसरों का कष्ट दूर करके रहते थे। एक बार तो उन्होंने अपने लिए बनवाई गई रजाई और कोट भी किसी ठिठुरते हुए को दे दिया और खुद काँपते हुए मजे से सर्दियाँ काट दीं।

आर्थिक संकट सदा उनका साथी रहा। इसके कारण वे अपनी मातृविहीन संतान की भी उचित देखभाल न कर पाए। पुत्री के अंतिम क्षणों में असहाय बने रहे और पुत्र को उचित शिक्षा न दे पाए।

एक बार तो उन्होंने कवयित्री को 300 रुपए देकर अपने खर्च का बजट बनाने के लिए कहा था। पर बजट बनते-बनते तक सारे पैसे लेकर जरूरतमंद लोगों को दे डाले।

एक बार प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त ने उनका आतिथ्य ग्रहण किया था। जब वे आए तो वे दियासलाई के प्रकाश में उन्हें लेकर तंग सीढ़ियों से होकर अपने सुविधा रहित कक्ष में पहुँचे तो वहाँ ढंग का बिस्तर भी नहीं था। फिर उन्होंने घर में धोती, चादर जो कुछ मिला उसे तख्त पर बिछाकर बड़े प्यार से उन्हें प्रतिष्ठित किया था। अतिथि का सत्कार करने के लिए उन्होंने कवयित्री से एक बार जलावन लकड़ी और घी तक माँग लिया था।

समकालीन साहित्यकारों की व्यथा के बारे में सुनकर वे विचलित हो जाते थे। एक बार सुमित्रानंदन पंत की मृत्यु की झूठी खबर पढ़कर वे बेचैन हो गए थे और सच्चाई जानने के लिए सारी रात जागते हुए इंतजार करते रहे।

एक बार तो उन्होंने अपने दोनों अधोवस्त्र और उत्तरीय गेरू में रंग डाले थे। कवयित्री उनका रूप देखती रह गई थीं। कहने लगे, “अब ठीक है। जहाँ पहुँचे, किसी नीम या पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए। दो रोटियाँ माँग कर खा लीं और गीत लिखने लगे।”

निराला जी के विशाल डील-डौल से देखने वाले के हृदय में आतंक उत्पन्न हो जाता था, पर उनकी आत्मीयता से यह भय तिरोहित हो जाता था।

निराला ऐसे व्यक्तित्व थे जिनके बारे में अलग-अलग व्यक्तियों की अलग-अलग धारणाएँ थीं। कोई उनकी उदारता की प्रशंसा करते नहीं थकता तो कोई उनके उद्धत व्यवहार की निंदा करते नहीं हारता। पर उन्हें समझ पाना हर किसी के वश की बात नहीं थी।

निराला जी अपने युग की विशिष्ट प्रतिभा थे। वे एक विद्रोही साहित्यकार थे। कवयित्री का मानना है कि निराला जी किसी दुर्लभ सीप में ढले सुडौल मोती नहीं थे, वे तो अनगढ़ पारस के भारी शिलाखंड थे। पारस की अमूल्यता दूसरों का मूल्य बढ़ाने में होती है। उसके मूल्य में तो न कोई कुछ जोड़ सकता है, न कुछ घटा सकता है।

निराला भाई शब्दार्थ

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