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Class 9 (SSC)Hindi (Lokbharati / Sulabhbharati)2026-27 Syllabus

Chapter 10 अपराजेय Solutions

Complete Maharashtra State Board Balbharati & Yuvakbharati textbook solutions for Chapter 10 अपराजेय. Step-by-step solved exercises, numerical problems, and digest answers.

82 Solved Questions17 Diagrams4488 words

Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 10 अपराजेय (पूरक पठन)

Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 10 अपराजेय Textbook Questions and Answers

श्रवणीय:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
हेलन केलर की जीवनी का अंश सुनिए और मुख्य मुद्दे सुनाइए।

लेखनीय:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
कला की साधना जीवन के दुखमय क्षणों को भुला देती है। इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः कृति (ग) की स्वमत अभिव्यक्ति देखिए।

पठनीय:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
सुदर्शन की ‘हार की जीत’ कहानी पढ़िए।

1. सुचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

प्रश्न 1. संजाल पूर्ण कीजिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
परिच्छेद से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए कि जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
1. घर 2. पेड़
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
‘कला में अभिरूचि होने से जीवन का आनंद बढ़ता है।’ अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
कला जीवन का प्रतिरूप है। वह जीवन का आनंद है। प्रत्येक व्यक्ति को कला का शौक होता है। कला में अभिरूचि होने से व्यक्ति उसकी साधना में लगा रहता है। ऐसे में वह स्वयं को भी भूल जाता है। सिर्फ कला के अलावा उसे अन्य चीज़ की याद नहीं आती है। वह अपनी मनचाही कला के सौंदर्य एवं माधुर्य में मशगुल हो जाता है। कला का लुत्फ़ उठाते समय उसका चित्त आनंदविभोर हो जाता है।

वह कला को ही अपने जीवन का आधार मानकर स्वयं के जीवन को सुंदर बनाता है। निरंतर कला के सान्निध्य में रहने के कारण वह मन से तरोताजा रहता है। ऐसे व्यक्ति को फिर संपूर्ण विश्व सुंदर एवं खिला हुआ दिखाई देता है। इस प्रकार कला में अभिरूचि होने से जीवन का आनंद बढ़ता है।

आसपास:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
कलाक्षेत्र में ‘भारतरत्न’ उपाधि से अलंकृत महान विभूतियों के नाम, क्षेत्र, वर्षानुसार सूची बनाइए।

मौलिक सृजन:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘समाज के जरूरतमंद लोगों की मैं सहायता करूँगा।’ इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः मानव होने का सही अर्थ यही है कि मनुष्य को अपने जीवन में दूसरों की सेवा करनी चाहिए। मानव का जन्म लोगों की सेवा करने के लिए हुआ है। सेवा ऐसा भाव है जिससे सेवा करने वाला भी सुख पाता है और जिसकी सेवा की जाती है वह भी सुख पाता है। जो मनुष्य दूसरों के दुख दूर करने के लिए प्रयास करता है, ऐसा ही मनुष्य सच्चा मनुष्य कहलाने का अधिकारी होता है। कवि गुप्त जी ने लिखा ही है

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।

मैं भी समाज के जरुरतमंदों की सहायता करना चाहता हूँ। समाज में सर्वत्र दीन-दुखी, पीड़ित एवं व्यथित लोग हैं। उनकी सहायता करने से मुझे आत्मिक तृप्ति मिलेगी। आखिर मानव सेवा ही ईश्वर की पूजा के समान होती है।

आज हमारे समाज में ऊँच-नीच का भेदभाव दिखाई दे रहा है। कई ऐसे गरीब बच्चे हैं जो फुटपाथ पर ही रहते हैं। वे स्कूल नहीं जाते हैं। मैं ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आऊँगा। उन्हें सही राह दिखाने का प्रयास करूंगा। मैं अनाथ आश्रम में जाकर वहाँ रहने वाले बच्चों के लिए खेल एवं शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन करूंगा; ताकि उन्हें आनंद की प्राप्ति हो।

समाजसेवा के इस पुनीत कार्य में मैं अपने मित्रों को भी सम्मिलित करवाऊँगा क्योंकि मिल-जुलकर अच्छा काम करने में जो मजा है वह अन्य किसी काम में नहीं। अपने मित्रों के साथ मिलकर मैं गरीब बच्चों एवं लोगों के लिए चंदा इकट्ठा करूँगा। उनके लिए कपड़े व अनाज आदि सामग्री का संग्रह करूँगा। मुझे आशा है कि मेरे इन कार्यों से प्रेरणा लेकर अन्य लोग मेरा अनुकरण करेंगे। उस वक्त मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। अंत में सिर्फ इतना ही कहूँगा:

चाह यही, आस यही, कामना यही, भावना यही; कर सकूँ अपनी जिंदगी में जरूरतमंदों की सेवा यही।

पाठ से आगे:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
दिव्यांग महिला खिलाड़ियों के बारे में जानकारी प्राप्त करके टिपणी तैयार कीजिए।

पाठ के आँगन में……..

1. सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

प्रश्न (क)
केवल एक शब्द में

Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए।

उत्तरः

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
‘हीन’ शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः जैसे: आत्म + हीन = आत्महीन

प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है। स्पष्ट कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः कृति (ख) की स्वमत अभिव्यक्ति देखिए।

प्रश्न (ख)
पाठ में प्रयुक्त वाक्य पढ़कर व्यक्ति में निहित भाव लिखिए।
1. ‘टाँग ही तो काटनी है, तो काट दो।’
2. ‘मैं जानता हूँ कि जीवन का विकास पुरुषार्थ में है, आत्महीनता में नहीं।’

Solution & Step-by-Step Answer:

1. हास्य व सहज भाव, निडरता, सकारात्मकता, दृढ़ निश्चय
2. शांत भाव, संघर्ष शीलता, दृढ़ निश्चय

Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 10 अपराजेय Additional Important Questions and Answers

(क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कारण लिखिए।

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
सभी के चेहरे पर अकुलाहट थीं। उत्तरः दुर्घटना में अमरनाथ घायल हो गए थे। उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। इसीलिए सभी के चेहरे पर अकुलाहट थीं।

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
अमरनाथ के परिवार वाले रात को एक बजे पुलिस स्टेशन गए थे।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः अमरनाथ शाम तक घर पहुँचने वाले थे लेकिन रात के नौ बज गए फिर भी वे घर नहीं पहुंचे। उनके मोबाइल की घंटी बज रही थी लेकिन वे मोबाइल उठा नहीं रहे थे। इसीलिए अमरनाथ के परिवार वाले रात को एक बजे पुलिस स्टेशन गए थे।

कृति (2) आकलन कृति

किसने, किससे कहा?

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘पर हुआ कैसे?’
Solution & Step-by-Step Answer:
ः यह वाक्य चोपड़ा ने अनिल से पूछा।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
‘ट्रकवाला जरूर पिया होगा।’
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
यह वाक्य अनिल ने चोपड़ा से कहा।
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में प्रयुक्त ऐसे अंग्रेजी शब्द लिखिए जिनका हिंदी में प्रयोग होने लगा है।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
गद्यांश से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए कि जिनके वचन परिवर्तित नहीं होते हैं।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. फोन 2. पुलिस
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
‘अकुलाहट’ इस शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय पहचानकर लिखिए और उस संबंधित प्रत्यय से अन्य दो शब्द तैयार कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
‘आहट’ प्रत्यय; अन्य शब्द: 1. कड़वाहट 2. घबराहट

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘अपनी देखी हुई एक दुर्घटना।’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए। उत्तरः ग्रीष्मावकाश में हम सब नैनिताल जा रहे थे। दोनों ओर पहाड़ियाँ ही पहाड़ियाँ थीं। रास्ते के दोनों ओर से गाडियाँ आ-जा रही थीं। अचानक सामने से एक बड़ा ट्रक आया और उसने हमारी गाड़ी के आगे जो एक गाड़ी थी उसे जोर से धक्का दे दिया। जिस कारण आगे वाली गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हमारे ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी को ब्रेक लगा दिया। हम तुरंत अपनी गाड़ी से बाहर आकर दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी के पास पहुँचे।

ट्रकवाले के पास भी इंसानियत थी। उसने भी बाहर आकर घायल लोगों की सेवा करना अपना धर्म समझा। गाड़ी में दो लोग थे जिनमें से एक को हल्की चोट आई थी परंतु दूसरे के सिर से रक्तस्राव हो रहा था। हमने आव देखा न ताव, उसे अपनी गाड़ी में बिठाकर नज़दीकी अस्पताल लेकर गए। तुरंत किए गए उपचारों के कारण वह स्वस्थ हो गया। उसकी जान बचाकर हमें बहुत खुशी हुई।

(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए।

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
अगर अमरनाथ बेहोश न हुए होते तो …………….
Solution & Step-by-Step Answer:
ः (क) अपनी टाँग को कटने से जरूर बचा लेते। (ख) ड्राइवर को जरूर बचा लेते। (ग) ट्रक वाले को भागने नहीं देते।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
यदि अमरनाथ की टाँग काटी न गई तो …………… (क) उनके शरीर में जहर फैल जाएगा। (ख) उनकी मृत्यु हो जाएगी। (ग) उनके लिए चलना मुश्किल हो जाएगा।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
1. अगर अमरनाथ बेहोश न हुए होते तो ड्राइवर को जरूर बचा लेते। 2. यदि अमरनाथ की टाँग काँटी न गई तो उनके शरीर में जहर फैल जाएगा।
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्न शब्द हों। 1. ड्राइवर 2. अमरनाथ
Solution & Step-by-Step Answer:
1. दुर्घटना में किसकी मृत्यु हो गई थी? 2. दुर्घटना में कौन बच गए थे?

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों में उचित प्रत्यय लगाकर नए शब्द तैयार कीजिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए। 1. जहर × ………… 2. भाग्यशाली × …………..
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अमृत 2. दुर्भाग्यशाली
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों में विरामचिह्नों का उचित प्रयोग कीजिए। 1. डॉक्टर ने कहा अमरनाथ जी आप दुर्घटना से बच गए हैं यह एक चमत्कार है 2. कितना भाग्यशाली हूँ मैं आखिर दुर्घटना से बच गया उत्तरः 1. डॉक्टर ने कहा, “अमरनाथ जी, आप दुर्घटना से बच गए हैं, यह एक चमत्कार है।” 2. ‘कितना भाग्यशाली हूँ मैं! आखिर दुर्घटना से बच गया।’

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है।’ स्पष्ट कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः इंसान के जीवन में परिस्थितियाँ आती ही रहती हैं। उसे जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति का सामना करना चाहिए। उनसे डरना नहीं चाहिए। जब व्यक्ति परिस्थितियों को सहर्ष स्वीकार कर लेगा; तब उसका हौंसला दुगुना हो जाएगा और इससे परिस्थितियों से लड़ने की ताकत उसमें अपने आप निर्माण हो जाएगी। यदि व्यक्ति परिस्थितियों के सामने अपनी हार स्वीकार कर लेगा; तो परिस्थितियाँ उस पर हावी हो जाएगी, जिससे इंसान का जीवन नरक-सा बन जाएगा। अत: जीवन को सुंदर एवं जिंदादिल बनाए रखने के लिए व्यक्ति को परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। आखिर इसी में जीवन की सार्थकता है।

(ग) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्य गद्यांश के क्रम के अनुसार लिखिए।

Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
संजाल पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित विधान सत्य है या असत्य लिखिए। 1. अमरनाथ के लिए उनका जीवन तीन फीट की टाँग से छोटा न था। 2. अमरनाथ के अनुसार जीवन जीने के लिए टाँगों की जरूरत होती है।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
1. सत्य 2. असत्य
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्न शब्द हों। 1. साठ 2. मूर्तिशिल्प
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अमरनाथ अपने जीवन के कितने वर्षों तक टाँगों के साथ जिए हैं? 2. मानव आकृतियों के चित्रों में किसका समन्वय था?
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
वचन बदलिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. चुस्ती-फुर्ती 2. रंग-रेखा
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए। 1. विश्व 2. शरीर
Solution & Step-by-Step Answer:
1. संसार 2. देह, तन
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में प्रयुक्त एक उपसर्ग युक्त शब्द व एक प्रत्यय युक्त शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. उपसर्गयुक्त शब्दः परिदृश्य – ‘परि’ उपसर्ग 2. प्रत्यय युक्त शब्दः जीवंतता – ‘ता’ प्रत्यय
प्रश्न 5 Maharashtra Board Solution
‘राहत मिलना।’ इस अर्थ के लिए गद्यांश में प्रयुक्त मुहावरा लिखिए। उत्तरः चैन की साँस लेना।
प्रश्न 6 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए। 1. व्हीलचेअर 2. रेगिस्थान
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
1. व्हीलचेयर 2. रेगिस्तान

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘कला की साधना जीवन के दुखमय क्षणों को भुला देती है।’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए। उत्तरः कला मनुष्य जीवन का आधार है। व्यक्ति को जिस कला में रूचि होती है; उस कला में व्यस्त हो जाना उसे अच्छा लगता है। व्यक्ति अपनी कला की साधना के लिए अपने जीवन के दुखमय क्षणों को भूल जाता है। अपनी सारी यातना एवं पीड़ा सब कुछ भूल जाता है। यहाँ तक कि उसे खाने-पीने का भी होश नहीं रहता। कब उठना है या कब सोना है, इसके बारे में भी उसे पता नहीं रहता।

वह सिर्फ अपनी कला के बारे में ही सोचता रहता है। अपनी मनचाही कला में निपुण होने के लिए वह दिन रात एक कर देता है। उसके जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य बन जाता है। वह है कला की साधना। इसके आगे उसे किसी से भी किसी भी प्रकार का सरोकार नहीं रहता। सिर्फ जीवन जीने के लिए कला और उसका आनंद लेना यही उसके जीवन का ध्येय हो जाता है।

(घ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके
Solution & Step-by-Step Answer:
निम्न शब्द हों। 1. बगीचा 2. क्यारियों
Solution & Step-by-Step Answer:
1. घर के सामने की जमीन में क्या बनाया था? 2. रंग-बिरंगे मौसम के फूल किसमें लगाए थे?
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
लिंग बदलिए। 1. माली 2. घर उत्तरः 1. मालिन 2. घर

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
परिच्छेद से विलोम शब्द की जोड़ी ढूँढ़कर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
भीतर × बाहर

(ङ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

कारण लिखिए।

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
डॉक्टर परेशान हो गया। उत्तरः डॉक्टर ने खून की जाँच फिर से करवाई तो उसे पता चला कि अमरनाथ जी के शरीर में बीमारी दुबारा फैल रही है। इसलिए वह परेशान हो गया।

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
घर के लोग सन्न हो गए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
अमरनाथ जी के शरीर में जहर फैल जाने के कारण उनकी बाँह काटनी पड़ेगी ऐसा डॉक्टर के कहने पर घर के लोग सन्न हो गए।

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित विधान सत्य है या असत्य लिखिए। 1. अमरनाथ के बाईं बाँह में खून की गर्दिश बंद हो गई थी। 2. अमरनाथ के लिए खुले कमीज सिलवाए गए।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. असत्य 2. सत्य
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्न शब्द हों। 1. शास्त्री जी 2. काठ-सी
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अमरनाथ जी किससे शास्त्रीय संगीत सीखना चाहते थे? 2. बाँह निर्जीव होकर कैसी हो गई थी?

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए। 1. सात दिनों का समूह 2. ऐसा संगीत जो भाव व रागों का खूबसूरत सरगम हो
Solution & Step-by-Step Answer:
1. सप्ताह 2. शास्त्रीय संगीत
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए। 1. बचपन 2. नर्स
Solution & Step-by-Step Answer:
1. बाल्यकाल 2. परिचारिका
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्य सूचना के आधार पर परिवर्तित कीजिए। 1. खून की जाँच की रिपोर्ट आई तो वह परेशान हो गया। 2. दाईं बाँह में खून की गर्दिश बंद हो जाने पर उसे हिलाना भी मुश्किल हो गया। (मिश्र वाक्य)
Solution & Step-by-Step Answer:
1. खून की जाँच की रिपोर्ट आने पर वह परेशान हो गया। 2. जैसे ही दाईं बाँह में खून की गर्दिश बंद हो गई; वैसे ही उसे हिलाना भी मुश्किल हो गया।
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित रेखांकित शब्दों के भेद लिखिए। 1. बीमारी फिर से पसर रही है। 2. उनकी दाईं बाँह काट दी गई थी।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अकर्मक क्रिया 2. गुणवाचक विशेषण

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जिंदादिल रहने वाले कभी दुखी नहीं होते।’ कथन के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
“जिंदगी जिंदादिली का नाम है। मुर्दादिल क्या खाक जिया करते है?” ऐसा ही कहा गया है। यह सत प्रतिशत सच है। चार दिन की जिंदगी होती है। इस छोटी-सी जिंदगी में इंसान को हर पल खुश रहना चाहिए। परिस्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल उसे हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। जो व्यक्ति इस तथ्य को जान लेता है; वह अपने जीवन में कभी-भी दुखी नहीं होता। वह प्रतिकूल परिस्थिति में भी अपना दैनिक जीवन सुचारू रूप से शुरू रखता है। उसे खंडित नहीं होने देता। वह अपने मनचाहे कार्य एवं शौक में मशगुल हो जाता है। यदि वह किसी कला का उपासक है तो वह अपना समय उसकी साधना में लगा देता है। अपने सारे दुख-दर्द एवं प्रतिकूल परिस्थितियों को भूलकर वह अपने जीवन में हमेशा प्रसन्न रहता है।

(च) परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए।

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
घर के लोग दुख से व्याकुल हो गए थे, क्योंकि ………. (क) अमरनाथ फिर से बीमार पड़े थे और फिर से तेज बुखार आ गया था। (ख) अमरनाथ अब कोई नई कला सीखना चाहते थे। (ग) अमरनाथ दुख एवं दर्द के कारण व्यथित हो गए थे।
Solution & Step-by-Step Answer:
घर के लोग दुख से व्याकुल हो गए थे क्योंकि अमरनाथ फिर से बीमार पड़े थे और फिर से तेज बुखार आ गया था।
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
संजाल पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
गद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ी ढूँढ़कर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
लौकिक × अलौकिक
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए। 1. रियाज 2. आँख
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अभ्यास 2. नयन
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में से कोई भी दो ऐसे शब्द ढूँढ़कर लिखिए कि जो बहुवचन में प्रयुक्त हुए हों। उत्तरः 1. रेखाएँ 2. लहरियाँ

प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए। 1. आत्मा से संबंधित 2. सांसारिक पदार्थों एवं वस्तुओं से संबंधित
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
1. आत्मिक 2. भौतिक
प्रश्न 5 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में से ‘इक’ प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 6 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए। 1. वे अस्पताल ले जाया गए। 2. उनकी आँख हँस रही थी।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. उन्हें अस्पताल ले जाया गया। 2. उनकी आँखें हँस रही थीं।

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘शास्त्रीय संगीत इंसान के जीवन में आनंद की अनुभूति कराने में प्रभावी साधन होता है।’ इस कथन पर अपने विचार लिखिए। उत्तरः शास्त्रीय संगीत भावों और रागों का खूबसूरत सरगम होता है। कहा जाता है कि ध्वनि ही ईश्वर का दूसरा रूप है और इसी ध्वनि से शास्त्रीय संगीत का जन्म हुआ है। मानव शरीर और मन को शास्त्रीय संगीत प्रभावित करता है। शास्त्रीय संगीत सुनते समय अगर आप अपने भीतर-ही-भीतर एक खास अवस्था में पहुँच जाए तो पूरा जगत आपके लिए ध्वनि हो जाता है। शास्त्रीय संगीत एक प्रकार की आध्यात्मिक प्रक्रिया है और आध्यात्मिक प्रक्रिया से मनुष्य को आनंद एवं सुख की प्राप्ति होती है। इसीलिए शास्त्रीय संगीत इंसान के जीवन में आनंद की अनुभूति कराने में प्रभावी साधन होता है।

(छ) परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
संजाल पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
उपर्युक्त गद्यांश पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके
Solution & Step-by-Step Answer:
निम्न शब्द हों। 1. कालिगुला 2. कजरी
Solution & Step-by-Step Answer:
1. गद्यांश में कौन से नाटक का जिक्र किया गया है? 2. अमरनाथ आँखें बंद करके किसकी तान सुनते थे?
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
कृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

कृति (3): शब्द संपदा

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्द के अनेकार्थी शब्द लिखिए। उत्तरः जीवन – पानी, जिंदगी

प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
गद्यांश में से उपसर्गयुक्त व प्रत्यययुक्त शब्द ढूँढ़कर लिखिए और उनके उपसर्ग व प्रत्यय भी अलग करके लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

शब्द

उपसर्ग

प्रत्यय

अनुकूलता

ता

आत्महीनता

ता

अद्वितीय

अपराजेय

प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए।

Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए। 1. कॅसेट 2. अन्तिम
Solution & Step-by-Step Answer:
ः 1. कैसेट 2. अंतिम

कृति (4): स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
‘जीवन का विकास पुरुषार्थ में हैं, आत्महीनता में नहीं।’ स्पष्ट कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः पुरुषार्थ का तात्पर्य मनुष्य के लक्ष्य या उद्देश्य को प्राप्त करने से है और आत्महीनता का तात्पर्य मनुष्य की मानसिक कमज़ोरी से है। यदि मनुष्य अपने जीवन में अपना विकास करना चाहता है तो उसे अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना पड़ेगा। उसे अपने मन में आने वाले विकार एवं मानसिक दुर्बल भावों को दूर भगाना होगा।

भले ही जीवन में कितनी भी बड़ी संकट की स्थिति निर्माण हो जाए फिर भी मनुष्य को अपनी आत्मिक शक्ति को नहीं खोना चाहिए। उसकी आत्मिक शक्तियाँ इतनी सशक्त होनी चाहिए कि वह जीवन में निर्माण होने वाली स्थितियों का सामना कर सके। यदि व्यक्ति के मन में दृढ़ संकल्प एवं दैदीप्यमान इच्छाशक्ति है, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। इससे व्यक्ति का विकास होता है। इसीलिए कहा गया है कि जीवन का विकास पुरुषार्थ में हैं, आत्महीनता में नहीं।

भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ।

भाषा बिंदू

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
काल परिवर्तन कीजिए।

Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित रेखांकित विकारी शब्दों के भेद पहचानिए। 1. दुर्घटनास्थल पर भयावह दृश्य था। 2. रात के एक बजे हम पुलिस स्टेशन पहुंचे।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. गुणवाचक विशेषण 2. उत्तम पुरूषवाचक सर्वनाम
प्रश्न 3 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों में से रेखांकित अव्ययों के भेद पहचानिए। 1. मुझे अभी मरना ही नहीं था। 2. अनिल ने डॉक्टर की तरफ देखकर कहा था।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. क्रियाविशेषण अव्यय 2. संबंधसूचक अव्यय
प्रश्न 4 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों के रचना की दृष्टि से प्रकार पहचनाकर लिखिए। 1. आपकी टाँग काटनी पड़ेगी। 2. अगर मैं उस वक्त बेहोश न हुआ होता तो उसे बचा लेता कभी भी मरने न देता।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. साधारण वाक्य 2. मिश्र वाक्य
प्रश्न 5 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों के अर्थ की दृष्टि से प्रकार पहचानकर लिखिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

प्रश्न 6 Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित अव्यय शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए।

Solution & Step-by-Step Answer:

संभाषणीय:

प्रश्न 1 Maharashtra Board Solution
विद्यालय में आते समय आपको रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त महिला दिखी। आपने उसकी सहायता की। इस घटना का वर्णन कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:

अपराजेय Summary in Hindi

लेखिका-परिचय:

जीवन-परिचय: लेखिका कमल कुमार आधुनिक युग की प्रमुख कहानीकार हैं। इनका जन्म हरियाणा के अंबाला जिले में हुआ था। उपन्यास के क्षेत्र में इन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है। इन्होंने व्यक्ति के जीवन अनुभवों को अपनी कहानी के द्वारा अभिव्यक्त करने का कार्य किया है। इन्होंने आसक्ति, आशा, आस्था एवं जीवन के स्पंदन को अपनी कहानियों के द्वारा चित्रित किया है।

प्रमुख कृतियाँ: कहानी संग्रह – ‘पहचान’, ‘क्रमशः’, ‘फिर से शुरू’ आदि उपन्यास – ‘अपार्थ’, ‘आवर्तन’, ‘हैमबरगर’, ‘पासवर्ड’ आदि।

गद्य-परिचय:

वर्णनात्मक कहानी: वर्णनात्मक कहानी हिंदी साहित्य विधा का एक प्रमुख अंग है। जीवन की किसी घटना का रोचक़, सुंदर एवं प्रवाही वर्णन ही ‘वर्णनात्मक कहानी’ कहलाता है।

प्रस्तावना: प्रस्तुत कहानी के माध्यम से लेखिका कहना चाहती हैं कि व्यक्ति को अपने जीवन में प्रत्येक परिस्थितियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए क्योंकि परिस्थितियाँ निमंत्रण देकर नहीं आती हैं। वे कभी-भी व्यक्ति के जीवन में निर्माण हो सकती हैं। व्यक्ति को सिर्फ उनसे लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।

सारांश:

अमरनाथ कहानी के प्रमुख पात्र हैं। वे दूसरे शहर में कुछ काम के सिलसिले में गए थे। वहाँ से लौटते समय अलवर के रास्ते में उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। जिस कारण उनके ड्राइवर की मृत्यु हो जाती है। चार घंटे तक वे बेहोशी के हालत में दुर्घटनास्थल पर घायल होकर पड़े रहते है। इस कारण उनके शरीर में जहर फैल जाता है और डॉक्टर को उनकी एक टाँग काटनी पड़ती है। वे सहर्ष अपनी टाँग कटवाने के लिए तैयार हो जाते हैं। टाँग कट जाने का उन्हें तनिक भी दुख नहीं होता है। इसके बाद वह स्वचालित व्हीलचेयर पर विराजमान हो जाते हैं और अपनी चित्रकारी को पूरा कराने के लिए कैनवस रंग, ब्रश और ईजल मँगवाते हैं। कुछ दिनों के पश्चात डॉक्टर फिर से उनके खून की जाँच करते हैं।

तब उन्हें पता चलता है कि बीमारी फिर से फैल रही है। जिस कारण उनकी दाईं बाँह डॉक्टर को काटनी पड़ती है। फिर भी अमरनाथ प्रसन्न रहते हैं। उन्हें अपनी बाँह कटने का रत्ती भर भी दुख नहीं होता है। अस्पताल से घर आने के पश्चात वह शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू कर देते हैं। वे दिन-रात संगीत साधना में व्यस्त रहते हैं। वे स्वयं दिव्यांग हैं; इस बात को भी वे भूल जाते हैं। फिर से डॉक्टर उनके खून की जाँच करते हैं। अबकी बार उनकी आवाज चली जाती है। फिर भी अमरनाथ परिस्थितियों से हार मानने वाले नहीं थे।

अस्पताल से घर आकर संगीतज्ञों की कैसेट डिस्क म्यूजिक सिस्टम उनके कमरे में साइन बोर्ड पर रख दिया जाता है। संगीत सुनना पक्षियों का कलरव सुनना, सूखे पत्ते व कलियों की आवाज सुनने का उनका शौक बढ़ता ही जाता है। वे जानते हैं कि ईश्वर उनके एक-एक अंग को उनसे अलग कर रहा है। फिर भी वे टससे-मस नहीं होते हैं। वे ईश्वर के विरुद्ध शांत संघर्ष करते हैं। वे हार मानने वालों में से नहीं हैं। वे हमेशा अपराजेय ही रहेंगे। जीवन के हर पल, हर स्थिति एवं हर वस्तु में अद्वितीय ही रहेंगे। आखिर वे मानते हैं कि मनुष्य के जीवन का विकास पुरूषार्थ में हैं, आत्महीनता में नहीं।

शब्दार्थ: