Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 4 किताबें
Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 4 किताबें Textbook Questions and Answers
संभाषणीय :

पठनीय :
श्रवणीय :
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
सफदर हाश्मी रचित ‘किताबें कुछ कहना चाहती हैं’ कविता सुनिए। |
आसपास :
प्रश्न 1. ‘पुस्तकांचे गाव- भिलार’ संबंधी जानकारी समाचार पत्र/अंतरजाल आदि से प्राप्त कीजिए और उसे देखने का नियोजन कीजिए। |
कल्पना पल्लवन :
प्रश्न 1. ‘ग्रंथ हमारे गुरु’ चर्चा कीजिए तथा अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
पाठ के आँगन में : 1. सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए : प्रश्न क. प्रश्न ख.
प्रश्न ग.
2. प्रथम पाँच पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
प्रथम पाँच पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। उत्तरः किताबें मनुष्य की साथी हैं। किंतु कंप्यूटर के अधिकाधिक प्रयोग के कारण इनमें लोगों की रुचि कम होने लगी है। अब स्थिति यह है कि ये किताबें बंद अलमारी के शीशों से झाँकती हैं। बड़ी उम्मीद से शीशों के बाहर ताकती हैं। एक समय था जब मनुष्यों की शामें किताबों के संगत में व्यतीत होती थीं और अब स्थिति यह है कि महीनों तक मनुष्य और किताबों की मुलाकात नहीं होती। |
पाठ से आगे :
अपने तहसील/जिले के शासकीय ग्रंथालय संबंधी जानकारी निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर प्राप्त कीजिए :
स्थापना-तिथि/वर्ष, संस्थापक का नाम, पुस्तकों की संख्या, विषयों के अनुसार वर्गीकरण
भाषा बिंदु :
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
शब्द-युग्म पूरे करते हुए वाक्यों में प्रयोग भाषा बिंदु कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः
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Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 4 किताबें Additional Important Questions and Answers
(क) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति (1) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए। i. अब मनुष्य की शामें अक्सर यहाँ बीतती हैं ii. मनुष्य से बढ़ती दूरी के कारण किताबों की स्थिति
Solution & Step-by-Step Answer:
i. कंप्यूटर के पर्यों पर। ii. बेचैन रहती हैं।
कृति (2) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
सही विधान चुनकर पूर्ण वाक्य फिर से लिखिए। |
i. किताबें झाँकती हैं …………….।
(क) कंप्यूटर के पर्यों पर
(ख) नींद में
(ग) बंद आलमारी के शीशों से।
किताबें झाँकती हैंबंद आलमारी के शीशों से।
ii. मनुष्य की शामें गुजरती हैं ……………
(क) किताबें पढ़ने में।
(ख) कंप्यूटर के पर्दो पर।
(ग) लोगों के बीच।
उत्तर:
मनुष्य की शामें गुजरती हैंकंप्यूटर के पर्दो पर।
प्रश्न 3
Maharashtra Board Solution
पद्यांश के आधार पर सही जोड़ियाँ मिलाइए।
Solution & Step-by-Step Answer:
(ख) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति (1) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
कृति (2) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
उत्तर लिखिए। i. कंप्यूटर की विशेषता ii. कंप्यूटर आने से किताबों की स्थिति
Solution & Step-by-Step Answer:
i. क्लिक करने पर पलक झपकते ही डिजिटल पर्दे पर बहुत कुछ एक-एक करके शीघ्रता से खुल जाता है। ii. किताबों का जो जाती राब्ता (संपर्क) था, वह कट गया।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए। i. कंप्यूटर आने से पुस्तकों का सम्मान बढ़ गया। ii. कंप्यूटर के कारण पुस्तकों से हमारा संपर्क बढ़ गया।
Solution & Step-by-Step Answer:
i. असत्य ii. असत्य
प्रश्न 3
Maharashtra Board Solution
पद्यांश के आधार पर विधान पूर्ण कीजिए। i. कोई सफा पलटता है तो ……………. | ii. बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है ………….. |
Solution & Step-by-Step Answer:
i. कोई सफा पलटता है तो इक सिसकी निकलती है, ii. बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है परदे पर,
कृति (3) भावार्थ निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
वह सारे …………. नहीं उगते।। भावार्थः कवि कंप्यूटर युग में पुस्तकों और मनुष्यों के बीच बढ़ती हुई दूरी का वर्णन करते हुए कहते हैं कि, एक समय था जब ये किताबें हमारे साथ रहकर हमें हमारे रिश्तों-संबंधों के बारे में बताती थीं। वे सारे संबंध अब उधड़ गए हैं, टूट गए हैं। अब पन्ने पलटने पर हमारे गले से करुण सिसकी निकलती है।आँखों में आँसू आ जाता है। इतना ही नहीं आज व्यक्ति और किताबों के बीच संपर्क का दायरा इतना सिमट गया है कि उनके शब्दों के मान-सम्मान गिर चुके हैं। उनके शब्द अब बिन पत्तों के सूखे-दूंठ से जीर्ण-शीर्ण लगते हैं। जिनका अब कोई मतलब (अर्थ) नहीं है। |
(ग) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति (1) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
कृति (2) आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
समझकर लिखिए। i. इस बहाने से रिश्ते बनते थे – ii. इनको रिहल की सूरत बनाकर नीम सजदे पढ़ा करते थे
Solution & Step-by-Step Answer:
i. किताबें गिरने उठाने के बहाने ii. घुटनों को।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए। i. किताबे गोदी में रखकर लेट जाते थे। ii. किताबों में सूखे फूल और महके हुए चिट्ठी के पन्ने मिलते थे।
Solution & Step-by-Step Answer:
i. असत्य ii. सत्य
कृति (3) भावार्थ
पद्य-विश्लेषण पसंदीदा होने का कारण – कविता से प्राप्त संदेश या प्रेरणा – किताबें Summary in Hindi कवि-परिचय : जीवन-परिचय : गुलजार जी का जन्म पंजाब प्रांत में झेलम जिले के दीना गाँव में हुआ जो अब पाकिस्तान में है। उनका मूल नाम संपूरन सिंह कालरा है। वे एक कवि, पटकथा लेखक, फिल्म निर्देशक, नाटककार होने के साथ-साथ हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार भी हैं। पद्य-परिचय : नई कहानी : भारतीय स्वतंत्रता के बाद लिखी गई उन कविताओं को कहा गया जिनमें परंपरागत से आगे नए भावबोधों की अभिव्यक्ति के साथ ही नए मूल्यों और नए शिल्प विधान का अन्वेषण (खोज) किया गया। सारांश : आज के समय में कंप्यूटर के अत्याधिक प्रयोग के कारण किताबों के प्रति लोगों की रुचि कम होने लगी है। अब किताबें अलमारी में पड़ी रहती हैं, महीनों तक मनुष्य से उनकी मुलाकात नहीं होती। वे किताबें उधड़ी हुई होती हैं। पन्ने पलटने पर उनकी करुण सिसकी निकलती है। किताबों की निरंतर उपेक्षा हो रही है। कंप्यूटर पर एक क्लिक करते ही बहुत कुछ एक-एक कर शीघ्रता से खुल जाता है। यही कारण है कि किताबों से हमारे संपर्क का दायरा कम हो गया है। एक समय था, हम सीने पर किताबें रखकर लेट जाते थे तो कभी उन्हें माथे लगाकर प्रसन्न होते थे। एक दौर था जब किताबों के बहाने से कई रिश्तों की डोर बन जाती थी। किंतु अब किताबों के प्रति अरुचि के कारण यह रिश्ते नष्ट हो जाएँगे। उनका संपर्क टूट जाएगा और वे अपना अस्तित्व खो देंगे। भावार्थ : किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी …………….. अब अक्सर।। गुजर जाती हैं …………. वो सुनाती थीं।। वह सारे ………….. मानी नहीं उगते।। जुबां पर जो …………….. कट गया है।। कवि कंप्यूटर की गति व किताबों की निरंतर होती उपेक्षा व दुर्गति के संबंध में कहते हैं कि अब एक क्लिक करने पर बस पलक झपकते ही कंप्यूटर के डिजीटल परदे पर बहुत कुछ एक-एक करके शीघ्रता से खुलता चला जाता है। इसी का परिणाम है कि किताबों के पन्ने पलटने का जो स्वाद जिहवा पर आता था, वह भी हमसे ओझल हो गया है अर्थात पन्ने पलटते समय बार-बार जीभ पर अँगली रखने का आनंद समाप्त हो गया। किताबों में रचा-बसा हमारा संपर्क व हमारे संपर्क सूत्र का दायरा भी अब बहुत कुछ सिमट गया है। कभी सीने पे …………………… आइंदा भी।। मगर वो जो ………… वह शायद अब वही होंगें !! कवि कहते हैं कि किताबों के साथ कुछ यादगार बातें भी जुड़ी हुई होती थीं। कभी-कभी लोग इन किताबों में किसी के लिए फूल या संदेश-पत्र रख दिया करते थे, किंतु किताबों में जो रखे हुए सूखे फूल और महके हुए चिट्ठी के पन्ने मिला करते थे उनका क्या होगा। कवि गुलजार जी कहते है कि एक दौर था जब किताबों के गिरने-उठाने के बहाने से कई रिश्तों की डोर बन जाती थी। किंतु अब जिस तरह से किताबों में लोगों की अरुचि उत्पन्न हुई है, उससे यह रिश्ते नष्ट होते जाएँगे। उनका संपर्क सूत्र टूट जाएगा और वे अपना अस्तित्व खोकर काल के ग्रास की भाँति खत्म हो जाएँगे। शब्दार्थ : |






