Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lokbharti Chapter 1 बरषहिं जलद
Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 1 बरषहिं जलद Textbook Questions and Answers
कृति
कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए।
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:






उपयोजित लेखन
कहानी लेखन: ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई इस सुवचन पर आधारित कहानी लेखन कीजिए।
Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद Additional Important Questions and Answers
पद्यांश क्र.1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए: (i) मन डर रहा है इनका – [ ] (ii) बिजली की तुलना की गई है इससे – [ ] (iii) भूमि के पास आए बादल ऐसे लगते हैं – [ ] (iv) विद्यार्थी जिसे पाने के लिए पढ़ाई करते हैं – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
(i) मन डर रहा है इनका – [श्रीराम का] (ii) बिजली की तुलना की गई है इससे [दुष्ट की प्रीति से] (iii) भूमि के पास आए बादल ऐसे लगते हैं – [विद्वान की तरह] (iv) विद्यार्थी जिसे पाने के लिए पढ़ाई करते हैं – [विद्या]
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3
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जोड़ियाँ मिलाइए: (i) दमकती बिजली – दुष्टों के वचन (ii) भूमि पर गिरा पानी – राम का डरना (iii) बूंदों का प्रहार – दुष्ट की मित्रता (iv) बादलों की गर्जना – माया से लिपटा जीव
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) दमकती बिजली – दुष्ट की मित्रता (ii) भूमि पर गिरा पानी – माया से लिपटा जीव (iii) बूंदों का प्रहार – दुष्टों के वचन (iv) बादलों की गर्जना – राम का डरना
प्रश्न 4
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आकृति पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 5
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निम्नलिखित अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए: (i) संतों की सहनशीलता। (ii) जीव की निश्चिंतता। (iii) रास्तों का अदृश्य हो जाना। (iv) विद्वानों की विनम्रता
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) खल के बचन संत सह जैसे। (ii) होई अचल जिमि जिव हरि पाई। (iii) हरित भूमि तृन संकुल, समुझि परहि नहिं पंथ। (iv) जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।
कृति 2: (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
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निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए: (i) थिर – ……………………………………….. (ii) जथा – ……………………………………….. (iii) सदगुन – ……………………………………….. (iv) अघात – ………………………………………..
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) थिर -स्थिर (ii) जथा – यथा (iii) सदगुन – सद्गुण (iv) अघात – आघात।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए: (i) जलनिधि = …………………… (ii) गिरि = …………………… (iii) नदी = …………………… (iv) जल = ……………………
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) जलनिधि = समुद्र (ii) गिरि = पहाड़ (iii) नदी = सरिता (iv) जल = पानी।
कृति 3: (सरल अर्थ) प्रश्न. पदयांश क्र. 2 कृति 1: (आका
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए:
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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उत्तर लिखिए: इनकी तुलना की गई है, इनसे – (i) रात के अंधकार में जुगनू – [ ] (ii) ससि (अनाज) से भरपूर घरती – [ ] (iii) कृषि को निराने वाले किसान – [ ] (iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) रात के अंधकार में जुगनू – [घमंडियों के समाज से] (ii) ससि (अनाज) से भरपूर धरती – [उपकारी की संपति से] (iii) कृषि को निराने वाले किसान – [मोह-मद-मान त्यागने वाले विद्वान से] (iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [कलियुग पाकर भाग जाने वाले धर्म से]
प्रश्न 3
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द खोजकर लिखिए: (i) ग्रह – [ ] (ii) पेड़ – [ ] (iii) पत्ते – [ ] (iv) उपग्रह – [ ] (v) पौधा – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) ग्रह – [पतंग (सूर्य)] (ii) पेड़ – [बिटप] (iii) पत्ते – [पात] (iv) उपग्रह – [महि] (v) पौधा – [अर्क-जवास]
प्रश्न 4
Maharashtra Board Solution
तालिका पूर्ण कीजिए: इन्हें – यह कहा है (i) ………………….. – बटु समुदाय (ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – ………………….. (iii) (लुप्त हुई) धूल – ………………….. (iv) ………………….. – ज्ञान उत्पन्न हुआ
Solution & Step-by-Step Answer:
इन्हे – यह कहा है (i) दादुर – बटु समुदाय (ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – ज्ञान प्राप्त कर प्रफुल्लित होने वाला साधक (iii) (लुप्त हुई) धूल – क्रोध के कारण लुप्त हुआ धर्म (iv) (विषयों से विरक्त) मनुष्य – ज्ञान उत्पन्न हुआ।
प्रश्न 5
Maharashtra Board Solution
उत्तर लिखिए: पद्यांश में आया – (i) एक प्रसिद्ध धर्मग्रंथ – [ ] (ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [ ] (iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [ ] (iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) एक प्रसिद्घ धर्मग्रंथ – [वेद] (ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [क्रोध] (iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [चक्रवाक (चकवा)] (iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [पतंग]
प्रश्न 6
Maharashtra Board Solution
निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए: (i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – [ ]
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – बिनसइ-उपजइ म्यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग
कृति 2 : (शब्द संपदा)
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ वाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (i) हुए – ………………………. (ii) जैसे – ………………………. (iii) कहीं – ………………………. (iv) की – ……………………….
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) हुए – भए, भयऊ। (ii) जैसे – जनु, जस। (iii) कहीं – कतहुँ। (iv) की – कै।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: (i) दादुर (ii) धूरी (धूल) (iii) धर्म (iv) प्रजा
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) दादुर – पुल्लिग (ii) धूरी (धूल) – स्त्रीलिंग (iii) धर्म – पुल्लिग (iv) प्रजा – स्त्रीलिंग।
कृति 3 : (सरल अर्थ) भाषा अध्ययन (व्याकरण) प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियों कीजिए : 1. शब्द भेद : प्रश्न. 2. अव्यय: प्रश्न. 3. संधि : प्रश्न. 4. सहायक क्रिया: प्रश्न. 5. प्रेरणार्थक क्रिया: प्रश्न. 6. मुहावरे:
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: (i) आँखें फाड़कर देखना (ii) रुआँसा होना।
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) आँखें फाड़कर देखना। अर्थ: आश्चर्य से देखना। वाक्य: मनीष सर्कस के कलाकारों के करतब आँखें फाड़कर देख रहा था।
(ii) रुआँसा होना।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए: (हामी भरना, करवट बदलना) आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए स्वीकृति दी।
Solution & Step-by-Step Answer:
आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए हामी भरी।
7. कारक: 8. विरामचिह्न: प्रश्न. 9. काल परिवर्तन: प्रश्न. 10. वाक्य भेद:
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए: (i) बादल गरज रहे हैं और बिजली चमक रही है। (ii) अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे हरे-भरे तथा सुशोभित हो गए हैं।
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) संयुक्त वाक्य (ii) मिश्र वाक्य।
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए: (i) कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है। (प्रश्नवाचक वाक्य) (ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन सहते हैं। (निषेधवाचक वाक्य)
Solution & Step-by-Step Answer:
(i) क्या कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है? (ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन नहीं सहते।
11. वाक्य शुद्धिकरण: प्रश्न. उपयोजित लेखन निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए: इसके लिए उन्होंने सारे देश का दौरा किया और जहाँ से जो भी धन मिला, एकत्र किया। एक बार किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि आप कलकत्ता के फलाँ सेठ के पास जाइए। वहाँ आपको अवश्य कुछ धन मिलेगा। वे पहुँच गए उनके पास। उन्होंने सेठ जी से अपना उद्देश्य बताया। सेठ जी ने उन्हें कुछ देर इंतजार करने के लिए कहा और वे अपने काम में लग गए। दोपहर से शाम हो गई। सेठ जी ने उन्हें नहीं बुलाया। वे निराश हो गए थे। इतने में सेठ जी अपने केबिन से बाहर आए। वे सज्जन खड़े हो गए और बोले, “सेठ जी मुझे आज्ञा दीजिए, मैं चलूँ।” सेठ जी ने कहा, “बैठिए भाई, बैठिए! मैं आपका ही काम कर रहा था। ये लीजिए अपने परोपकार के काम में मेरा छोटा-सा सहयोग! इस समय मैं और कुछ नहीं दे पाऊँगा।” सेठ जी ने एक चेक उन सज्जन के हाथ में थमा दिया। उन महाशय ने चेक पर नजर डाली- ‘सात लाख रुपए।’ उनके मुँह से निकला, “सेठ जी, मुझे तो लगा था, मुझे यहाँ से खाली हाथ जाना पड़ेगा, पर आपने तो…।” “बस… बस!” उन्होंने उन सज्जन की बात काटते हुए कहा, “आप परोपकार का काम कर रहे हैं, मुझसे जो बन पड़ा, मैंने भी सहयोग दे दिया।” इस धन से विश्वविद्यालय के कई काम पूरे हुए। विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए यह धन एकत्र करने वाले व्यक्ति थे महामना मदनमोहन मालवीय और उन्होंने जिस विश्वविद्यालय का निर्माण किया, वह था ‘बनारस हिंदू विश्वविद्यालय। सीख: परोपकार सबसे बड़ा धर्म है। बरषहिं जलद Summary in Hindi विषय-प्रवेश : अवधी बोली में लिखा गया ‘रामचरितमानस’ विश्व के अमूल्य ग्रंथों में से एक है। प्रस्तुत काव्य खंड इसी ग्रंथ से लिया गया है। चौपाई और दोहों जैसे लोकप्रिय छंदों में प्रस्तुत इस काव्य खंड में तुलसीदासजी ने वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। इस काव्य खंड में उन्होंने वर्षा ऋतु से संबंधित विभिन्न वस्तुओं को जीवन से जोड़कर देखा है। यह काव्य खंड सीता हरण के पश्चात का है। श्रीराम और लक्ष्मण जी सीता जी की खोज में वन में भटक रहे हैं। बरसात की ऋत आ चुकी है पर सीता जी का पता नहीं चल सका है। कवि ने इस काव्य खंड में श्रीराम के मन की व्याकुलता का चित्रण किया है। बरषहिं जलद चौपाइयों और दोहों का सरल अर्थ 1. घन घमंड नभ …………………………… जिमि जिव हरि पाई।। (चौपाई) कवि कहते हैं कि आकाश में बादल उमड़-घुमड़कर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। (श्रीरामजी कह रहे हैं कि) प्रिया (सीता जी) के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजली आकाश में ऐसे चमक रही है, जैसे दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थिर नहीं रहती। यानी वह चमकती है और चमककर लुप्त हो जाती है। बादल पृथ्वी के नजदीक आकर (नीचे उतरकर) बरस रहे हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या प्राप्त कर विनम्र हो जाते हैं। बूंदों की चोट पहाड़ों पर पड़ रही है। पहाड़ बूंदों के प्रहार को इस प्रकार शांत भाव से सह रहे हैं, जैसे संत पुरुष दुष्टों के कटु वचनों को सह लेते हैं। छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भरकर अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ती जा रही हैं, जैसे मामूली धन पाकर भी दुष्ट लोग इतराने लगते हैं (यानी मर्यादा का त्याग कर देते हैं)। पृथ्वी पर गिरते ही पानी गँदला हो गया है, मानो प्राणी से माया लिपट गई हो। वर्षा का पानी एकत्र होकर तालाबों में भर रहा है। जैसे एक-एक कर सद्गुण सज्जन व्यक्ति के पास चले आते हैं। नदी का पानी समुद्र में जाकर उसी प्रकार स्थिर हो जाता है जिस प्रकार जीव हरि (ईश्वर) को प्राप्त कर अचल (आवागमन से मुक्त) हो जाता है। 2. हरित भूमि …………………………… होहिं सद्ग्रंथ।। (दोहा) पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरीभरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता है। यह दृश्य ऐसा लगता है, जैसे पाखंडी के पाखंड भरे मत के प्रचार से सद्ग्रंथ लुप्त हो जाते हैं। 3. दादुर धुनि चहुँ उपजे ग्याना।। (चौपाई) कवि कहते हैं कि वर्षा काल में चारों दिशाओं में मेढकों की ध्वनि ऐसी (सुहावनी) लगती है मानो विद्यार्थियों का समूह वेद-पाठ कर रहा हो। अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे ऐसे हरेभरे तथा सुशोभित हो गए हैं, जैसे साधना करने वाले किसी व्यक्ति का मन ज्ञान प्राप्त करने पर प्रफुल्लित हो जाता है। (बरसात के दिनों में) मदार और जवासा के पौधे पत्तों से रहित हो गए हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो अच्छे शासक के राज्य में दुष्टों का धंधा जाता रहा हो (खत्म हो गया हो)। धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है। जैसे क्रोध धर्म को दूर कर देता है, उसी तरह वर्षा ने धूल को नष्ट कर दिया है। अनाज से युक्त (लहलहाती हुई हरी-भरी खेती) पृथ्वी कुछ इस : प्रकार शोभायमान हो रही है, जैसे उपकार करने वाले व्यक्ति शोभायमान होते हैं। रात के अंधकार में जुगनू चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे घमंडियों का समूह एकत्र हो गया है। चतुर किसान अपनी फसलों की निराई कर रहे हैं। (अपनी फसल से घास-फूस निकालकर फेंक रहे हैं)। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे विद्वान लोग मोह, मद, माया का त्याग कर रहे हों। बरसात के दिनों में चक्रवाक पक्षी कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है जैसे कलियुग में धर्म पलायन कर गया हो। यह पृथ्वी अनेक प्रकार के जीवों से भरी पड़ी है। यह उसी तरह शोभायमान हो रही है, जैसे अच्छे राजा के राज्य में प्रजा की वृद्धि (विकास) होती है। यहाँ-वहाँ अनेक सही थककर इस तरह ठहरे हुए हैं, जैसे मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होने पर इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं और विषयों की ओर’ जाना छोड़ देती हैं। 4. कंबहुँ प्रबल …………………………… कुसंग-सुसंग।। (दोहा) कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं। कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो। |





