Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lokbharti Chapter 11 कृषक गान
Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 11 कृषक गान Textbook Questions and Answers
कृति
कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:





पंक्ति | भाव |
१. आज उसपर मान कर लूँ | |
२. आह्वान उसका आज कर लूँ | |
३. नव सृष्टि का निर्माण कर लूँ | |
४. आज उसका ध्यान कर लूँ। |
पंक्ति | भाव | ||||||||||||||||||||||||
१. आज उसपर मान कर लूँ | अभिमान | ||||||||||||||||||||||||
२. आह्वान उसका आज कर लूँ | मानवता | ||||||||||||||||||||||||
३. नव सृष्टि का निर्माण कर लूँ | सृजनशीलता | ||||||||||||||||||||||||
४. आज उसका ध्यान कर लूँ। | आदर
प्रश्न 5
Maharashtra Board Solution
कविता में आए इन शब्दों के लिए प्रयुक्त शब्द हैं: १. निर्माता – ____________ २. शरीर – ____________ ३. राक्षस – ____________ ४. मानव – ____________
Solution & Step-by-Step Answer:
१. निर्माता – सृजक २. शरीर – तन ३. राक्षस – असुर। ४. मानवता – मनुजता।
प्रश्न 6
Maharashtra Board Solution
कविता की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
कृषक के अभावों की कोई सीमा नहीं है। परंतु वह संतोष रूपी धन के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। पूरे संसार में कैसा भी वसंत आए, कृषक के जीवन में सदैव पतझड़ ही बना रहता है। अर्थात ऋतुएँ बदलती हैं, लोगों की परिस्थितियाँ बदलती हैं, परंतु कृषक के भाग्य में अभाव ही अभाव हैं। ऐसी दयनीय स्थिति के बावजूद उसे किसी से कुछ माँगना अच्छा नहीं लगता। वह हाथ फैलाना नहीं जानता। कृषक को अपनी दीन-हीन दशा पर भी नाज है। मैं ऐसे व्यक्ति पर अभिमान करना चाहता हूँ। कृषक के गीत गाना चाहता हूँ।
प्रश्न 7
Maharashtra Board Solution
निम्न मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए: 1. रचनाकार कवि का नाम: 2. रचना का प्रकार: 3. पसंदीदा पंक्ति: 4. पसंदीदा होने का कारण: 5. रचना से प्राप्त प्रेरणा:
Solution & Step-by-Step Answer:
(1) रचनाकार का नाम → दिनेश भारद्वाज। (2) कविता की विधा → गान। (3) पसंदीदा पंक्ति → हाथ में संतोष की तलवार ले जो उड़ रहा है। (4) पसंदीदा होने का कारण → अनगिनत अभावों के होते हुए भी कृषक के पास संतोष रूपी धन है। (5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा → कृषक दिन-रात परिश्रम करके संपूर्ण सृष्टि का पालन करता है। हमें उसके परिश्रम के महत्त्व को समझना चाहिए। उसका सम्मान करना चाहिए।
Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 11 कृषक गान Additional Important Questions and Answers पद्यांश क्र. 1 प्रश्न. → कृति 1: (आकलन) (1) कविता में आए इन शब्दों के लिए प्रयुक्त शब्द हैं: (2) सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए: → कृति 2: (शब्दल) (1) पद्यांश से प्रत्यय जुड़े हुए दो शब्द ढूँढकर लिखिए: (2) निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए: पद्यांश क्र. 2 प्रश्न. → कृति 1: (आकलन) (1) संजाल पूर्ण कीजिए:
(2) उत्तर लिखिए:
(3) आकृति पूर्ण कीजिए: (4) कविता की पंक्तियों को उचित क्रमानुसार लिखकर प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए: (5) आकृति पूर्ण कीजिए:
→ कृति 2: (शब्द संपदा) (1) पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: (2) निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग करके लिखिए: (3) पद्यांश में आए इन शब्दों के लिए प्रयुक्त शब्द हैं: → कृति 3: (सरल अर्थ) प्रश्न. पद्य विश्लेषण सूचना: यह प्रश्नप्रकार कृतिपत्रिका के प्रारूप से हटा दिया गया है। लेकिन यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में होने के कारण विद्यार्थियों के अधिक अभ्यास के लिए इसे उत्तर-सहित यहाँ समाविष्ट किया गया है। भाषा अध्ययन (व्याकरण) 1. शब्द भेद: 2. अव्यय: 3. संधि:
उत्तर:
4. सहायक क्रिया: 5. प्रेरणार्थक क्रिया: 6. मुहावरे: (ii) मन न लगना। (2) अधोरेखांकित वाक्यांशों के लिए उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए: (खून का चूंट पीकर रह जाना, पानी फेरना, पिंड छुडाना) 7. कारक: 8. विरामचिह्न: 9. काल परिवर्तन: 10. वाक्य भेद: (2) निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए: 11. वाक्य शुद्धिकरण: कृषक गान Summary in Hindi विषय-प्रवेश : प्रस्तुत गीत में गीतकार दिनेश भारद्वाज एक कृषक का महत्त्व प्रतिपादित कर रहे हैं। कृषक, जो कि संपूर्ण संसार का अन्नदाता है, स्वयं अभावों में जीता है। पर किसी के समक्ष हाथ नहीं फैलाता। कवि समाज में उसका सम्मान पूर्ववत स्थापित करना चाहते हैं। कविता का सरल अर्थ 1. हाथ में संतोष ………………………… का गान कर लूँ।। कृषक के अभावों की कोई सीमा नहीं है। परंतु उसके पास संतोष रूपी धन है। वह उसी संतोष के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। पूरे संसार में कैसा भी वसंत आए, कृषक के जीवन में सदैव पतझड़ ही रहता है। अर्थात ऋतुएँ बदलती हैं, लोगों की परिस्थितियाँ बदलती हैं, परंतु कृषक के भाग्य में अभाव ही अभाव हैं। ऐसी दयनीय स्थिति के बावजूद उसे किसी से कुछ माँगना अच्छा नहीं लगता। कृषक को अपनी दीन-हीन दशा पर भी नाज है। कवि कहते हैं कि में ऐसे व्यक्ति पर अभिमान करना चाहता हूँ। मैं कृषक के गीत गाना चाहता हूँ। 2. चूसकर श्रम रक्त ………………………… का गान कर लूँ।। कृषक दिन-रात खेतों में काम करता है। अपने रक्त को पसीने के रूप में बहाता है और संपूर्ण जगत को जीवन-रस प्रदान करता है। ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में उसके लिए धूप-छाया दोनों एक-सी हैं। मौसम में कैसा भी बदलाव आए, कृषक की स्थिति नहीं बदलती। मैं मानवता के साथ उसका आह्वान करना चाहता हूँ। मैं कृषक के गीत गाना चाहता हूँ। 3. विश्व का पालक ………………………… का गान कर लूँ।। कृषक संपूर्ण संसार का अन्नदाता है। वह अन्न उगाकर पूरे विश्व का पालन करता है। लोगों को जीवन देता है। किंतु अफसोस की बात है कि जिन लोगों को वह पालता है, उन्हीं के द्वारा उसे पददलित किया जाता है। अपमानित किया जाता है। मैं चाहता हूँ कि मैं कृषक का हाथ पकड़कर एक नवीन सृष्टि का निर्माण करूँ, जहाँ लोग उसके महत्त्व को समझें। उसका सम्मान करें। मैं कृषक के गीत गाना चाहता हूँ। 4. क्षीण निज बलहीन ………………………… का गान कर लूँ।। कृषक को जीवन में पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल पाती। उसे अपने दुर्बल, क्षीण शरीर को ढकने के लिए कपड़े तक नहीं प्राप्त होते। वह पत्तों से अपना तन ढकने को मजबूर होता है। कृषक ऊसर धरती में जी-तोड़ मेहनत करके, पसीने के रूप में अपने खून को बहाकर उसे उपजाऊ बनाता है। मेरे लिए वह सभी देवी-देवताओं से ऊपर है। मैं चाहता हूँ कि देव-दानवों के स्थान पर कृषक का ही ध्यान करूं, उसी के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करूं। मैं कृषक के गीत गाना चाहता हूँ। 5. यंत्रवत जीवित बना ………………………… का गान कर लूँ। कृषक एक जीवित मशीन के समान है। वह बिना अपने अधिकार माँगे मशीन की तरह पूरा जीवन काम करता रहता है। उस अन्नदाता, सृष्टि के पालक की दुर्दशा देखकर आज मानवता रो रही है। मैं कण-कण जोड़कर कृषक के लिए एक ऐसे नीड़ का, ऐसे घर का निर्माण करना चाहता हूँ, जहाँ उसे एक अच्छा जीवन जीने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त हों। मैं कृषक के गीत गाना चाहता हूँ। |





