Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात
Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 1 चाँदनी रात Textbook Questions and Answers
1. सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए :
(क) संजाल:


(ख) चाँदनी रात की विशेषताएँ:

2. निम्नलिखित पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए :
प्रश्न च.
चारु चंद्र ……….. झोंकों से।
उत्तर:
भावार्थ: गुप्त जी चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुंदर चंद्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। संपूर्ण पृथ्वी तथा आकाश में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है। पृथ्वी हरी-हरी घास की नोकों के माध्यम से अपनी खुशी प्रकट कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो वृक्ष भी मंद-मंद वायु के झोंकों से झूम रहे हैं।
प्रश्न छ.
क्या ही स्वच्छ ………. शांत और चुपचाप।
उत्तर:
भावार्थ: पंचवटी में दूर-दूर तक चाँदनी फैली हुई है, वह बहुत ही साफ दिखाई दे रही है। रात सन्नाटे से भरी है। कोई शब्द नहीं हो रहा है। वायु स्वच्छंद होकर अपनी स्वतंत्र चाल से मंद-मंद बह रही है। इस समय कौन-सी दिशा है जो आनंद नहीं ले रही है? अर्थात सभी दिशाएँ इस सौंदर्य से आनंदित हो रही हैं। उत्तरपश्चिम आदि सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है। कोई भी दिशा आनंद-शून्य नहीं है। ऐसे समय में भी नियति नामक शक्ति-विशेष के समस्त कार्य संपन्न हो रहे हैं। कोई रुकावट नहीं। वह एक भाव से अर्थात् अकेले-अकेले और चुपचाप अपने कर्तव्यों का निर्वाह किए जा रही है।
पाठ से आगे

संभाषणीय :
शरद पूर्णिमा त्योहार के बारे में चर्चा कीजिए।
भाषा बिंदु :
निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए। |


Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 1 चाँदनी रात Additional Important Questions and Answers
पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति (1) आकलन कृति
प्रश्न 1
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एक शब्द में
Solution & Step-by-Step Answer:
लिखिए। i. ये अपनी खुशी प्रकट कर रही है ii. ये वायु के झोंकों से झूम रहे हैं
Solution & Step-by-Step Answer:
i. पृथ्वी ii. वृक्ष
प्रश्न 2
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चौखट पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3
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चौखट पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 4
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समझकर लिखिए। i. पंचवटी की छाया में बना है ii. धनुर्धर इस पर बैठा हुआ है
Solution & Step-by-Step Answer:
i. पर्णकुटीर ii. स्वच्छ शिला पर
कृति (2) आकलन कृति
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए। i. क्या ही स्वच्छ/सुगंध चाँदनी है यह। ii. नियति नदी/नटी के कार्य-कलाप। उत्तरः i. क्या ही स्वच्छ चाँदनी है यह। ii. नियति नटी के कार्य-कलाप। |
प्रश्न 3
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आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
ः
|

प्रश्न 4
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सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए। i. पंचवटी में अंधेरी रात है। ii. सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
i. असत्य ii. सत्य कृति
प्रश्न 5
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चौखट पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 6
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सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए। i. पृथ्वी मोतियों को समेट लेती है। ii. सूर्य सबेरा होने पर मोतियों को बिखेर देता है।
Solution & Step-by-Step Answer:
i. असत्य ii. असत्य
प्रश्न 7
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एक-एक शब्द में उत्तर लिखिए। i. सबके सो जाने पर मोती ये बिखेरती है ii. सुबह होने पर मोतियों को ये बटोर लेता है
Solution & Step-by-Step Answer:
i. वसुंधरा ii. रवि
प्रश्न 8
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सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए। i. कुटीर पत्थरों का बना है। ii. कुटीर में धौर-वीर निर्भीक मनवाला युवक बैठा है।
Solution & Step-by-Step Answer:
i. असत्य ii. असत्य
कृति (3) भावार्थ निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।
लेखनीय :
कल्पना पल्टन :
पद्य-विश्लेषण : कविता का नाम – चाँदनी रात पसंदीदा होने का कारण – कविता से प्राप्त संदेश या प्रेरणा – चाँदनी रात Summary in Hindi कवि-परिचय: जीवन-परिचय: मैथिलीशरण गुप्त जी खड़ी बोली के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश में झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ। 12 वर्ष की अवस्था में उन्होंने ब्रजभाषा में कविता की रचना आरंभ की। उनकी रचनाएँ पवित्रता, नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और विशेषकर नारी के प्रति करुणा की भावना से ओतप्रोत हैं। उनकी रचनाओं से प्रसन्न होकर गाँधी जी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी। 12 दिसंबर 1964 ई. को दिल का दौरा पड़ने के कारण इनका निधन हो गया। पद्य-परिचय: खंडकाव्य: खंडकाव्य में मानव जीवन की किसी एक ही घटना की प्रधानता होती है। प्रासंगिक कथाओं को इसमें स्थान नहीं मिलता। सारांश: कवि चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि चंद्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। पृथ्वी से लेकर आकाश तक सर्वत्र चाँदनी बिछी हुई है। पूरी प्रकृति चाँदनी में सराबोर है। रात सन्नाटे में डूबी हुई है। वायु स्वच्छंद होकर मंद-मंद बह रही है। सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है। नियति चुपचाप अपने कर्तव्यों का पालन कर रही है। ऐसे में पंचवटी की छटा बहुत ही निराली प्रतीत होती है। उसकी घनी छाया में पत्तों की एक सुंदर कुटिया बनी हुई है। इसके सामने स्वच्छ शिला के ऊपर धैर्यशाली, निडर मनवाला एक पुरुष बैठा हुआ है। यह वीर ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे कामदेव योगी बनकर बैठा है। भावार्थ: चारु चंद्र की …………………………. झोंकों से।। क्या ही स्वच्छ ………………………….. और चुपचाप।। है बिखेर देती …………………………… छलकाता है।। पंचवटी की ……….. …………….. होता है।। शब्दार्थ: |



