Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 गागर में सागर
Hindi Lokvani 9th Std Digest Chapter 1 गागर में सागर Textbook Questions and Answers
भाषा बिंदु:
1. निम्नलिखित मुहावरों, कहावतों में गलत शब्दों के स्थान पर सही शब्द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए।
लेखनीय:
अपने दोस्तों के साथ मजाक मस्ती करते हुए उसने कहा कि, उसके ऐसा करने से कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला है। यदि वह कचरा नहीं फेंकेगा, तो भी नदी प्रदूषित होगी। अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसे आड़े हाथों लेते हुए डाँटा फटकारा। तत्पश्चात समझाते हुए कहा कि नदी हमारी माता है। हमें उसका ख्याल रखना चाहिए। जल ही जीवन है और हमें उसे भविष्य के लिए सँभालकर रखना चाहिए। मेरे इस कथन का उस बच्चे पर थोड़ा-बहुत असर हुआ। उसने भविष्य में जल को प्रदूषित न करने की कसम खा ली और अपने इस करतूत पर मुझसे माफी माँगी। मैंने भी उदार हृदय से उसे माफ कर दिया और हम तीनों नदी में फैले हुए कूड़े-कचरे को एकत्रित करने में व्यस्त हो गए।
रचनात्मकता की ओर:
यह दोहा तब याद आता है जब कोई अपने आलोचकों को उनके आलोचना के बदले सजा देने की बात करता है। यद्यपि आलोचक निश्चय ही हमारी कमियों को गिनवाते हैं, हमें हमारी वास्तविकता का एहसास करवाते हैं परंतु आलोचक वह व्यक्ति होते हैं जिसकी आलोचनाओं की सहायता से हम अपने कार्यों को काफी हद तक सुधार सकते हैं। बड़े बुजुर्गों ने कोई भी चीज बिना अर्थ के नहीं लिखी, निश्चय ही हमारे जीवन में उसका महत्त्वपूर्ण सहयोग है।
आलोचकों का हमारे जीवन में बड़ा सहयोग रहा है, इतिहास गवाह है कि बिना आलोचकों के कोई भी शासक न तो अपना राज्य संभाल पाया है और न ही अपने राज्य का विस्तार कर पाया है। बिना आलोचना के शासक अपने मद में चूर होकर गलतियाँ कर बैठता है और अपने राज्य से हाथ धो बैठता है। आलोचनाएँ हमको शक्ति प्रदान करती हैं, जो हमें अपनी गलतियाँ सुधारने का मौका देती हैं और भविष्य के लिए रणनीति बनाने का अवसर भी प्रदान करती हैं, अत: आलोचनाओं का हमेशा स्वागत करना चाहिए।
ऐसा नहीं है कि ये आलोचनाओं वाला सुझाव केवल किसी एक पार्टी और उसके सदस्यों या किसी एक समाज तक सीमित है। सभी शासकों को ये बात ध्यान में रखनी चाहिए, शासक ही क्यों हम सभी को ये बात याद रखनी चाहिए कि अगर हम किसी के द्वारा गिनाए हुए कमियों को स्वीकार करके उसमें सुधार नहीं कर सकते तो फिर हम भविष्य में अथाह गलतियाँ करनेवाले हैं, और अगर हम कमियों को सुधार नहीं सकते तो फिर कोई हक़ नहीं कि हम उन आलोचकों को कमियाँ बताने से भी रोकें, ये आलोचकों का जन्म सिद्ध अधिकार था, है, और हमेशा रहेगा। इसलिए आलोचनाओं का स्वागत करें, तथा अपनी कमियों को सुधारें ….।
पाठ के आँगन में:
Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 1 गागर में सागर Additional Important Questions and Answers
(क) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति क (1): आकलन कृति

कृति क (2): सरल अर्थ
लोभी व्यक्ति के व्यवहार का वर्णन करते हुए बिहारी जी कहते हैं कि लोभी व्यक्ति दीन-हीन बनकर घर-घर घूमता है और प्रत्येक व्यक्ति से हाथ फैलाकर याचना करता है। लोभ का चश्मा आँखों पर लगा लेने के कारण उसे तुच्छ व्यक्ति भी बड़ा अर्थात धनवान दिखाई देने लगता है अर्थात लालची व्यक्ति विवेकहीन होकर योग्य-अयोग्य व्यक्ति को भी नहीं पहचान पाता।
(ख) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति ख (1): आकलन कृति

कृति (2): सरल अर्थ
(ग) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति ग (1): आकलन कृति

कृति ग (2): सरल अर्थ
(घ) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति (1): आकलन कृति

कृति (2): सरल अर्थ
गागर में सागर Summary in Hindi
कवि-परिचय:
जीवन-परिचय: कवि बिहारी जी का जन्म ग्वालियर में हुआ था। इन्होंने नीति और ज्ञान के दोहों के साथ-साथ प्रकृति का चित्रण भी बहुत ही सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया है। प्रमुख कृतियाँ : काव्य-सतसई (‘सतसई’ बिहारी की एक मात्र रचना है, इसमें 611 दोहे संकलित हैं।)
पद्य-परिचय:
दोहे: इसमें दो पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें चार चरण होते हैं। इसका प्रथम और तृतीय चरण १३-१३ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण 11-11 मात्राओं का होता है।
प्रस्तावना: प्रस्तुत कविता ‘गागर में सागर’ के कवि बिहारी जी ने अपने दोहों के माध्यम से व्यवहारिक जगत की कुछ महत्त्वपूर्ण नीतियों से अवगत कराया है।
सारांश:
प्रस्तुत कविता के माध्यम से नीति विषयक पाठ पढ़ाते हुए कवि बिहारी ने अपना मत प्रकटीकरण किया है। कवि बिहारी के अनुसार कृष्ण के प्रेम में डूबे मन की गति कोई भी नहीं समझ सकता है। लोभी को तुच्छ व्यक्ति भी बड़ा दिखाई पड़ता है। सोने में धतूरे से भी अधिक नशा होता है। व्यक्ति अपने नाम से नहीं गुणों से महान बनता है। मनुष्य और नल के पानी की दशा एक समान होती है। प्यास बुझानेवाला छिछला जलाशय भी प्यासे के लिए समुद्र के समान होता है। बुरे व्यक्ति के बुराई छोड़ने पर भी लोग उससे डरते हैं। मन की जिसमें जितनी रुचि होती है, वह उसे उतना ही पसंद होता है।
शब्दार्थ: