Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 मैं बरतन माँगूँगा
Hindi Lokvani 9th Std Digest Chapter 2 मैं बरतन माँगूँगा Textbook Questions and Answers
1. संजाल पूर्ण कीजिए।

2. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय छाँटकर लिखिए।
3. गद्यांश पढ़कर प्राप्त होने वाली प्रेरणा लिखिए।
4. कारण लिखिए।
5. ‘अध्यापक के साथ विद्यार्थी का रिश्ता’ विषय पर स्वमत लिखिए।
भाषा बिंदु:

लेखनीय:
वह डॉक्टर एक सर्जन थे और बड़े ही अच्छे स्वभाव के थे। सतीश भी बड़े लोगों की गाड़ियों को देखकर बहुत ही खुश होता था। गाड़ी सही करते वक्त वह डॉक्टर साहब से बोला- आप का और मेरा काम तो एक समान है, फिर भी आप मुझसे ज्यादा पैसा क्यों कमाते हैं? आप देखो न, जैसे मैं गाड़ी का इंजन खोलता हूँ उसी तरह आप भी ऑपरेशन करते हैं।
डॉक्टर साहब बहुत ही विनम्र होकर बोले, आप जो काम करते हो वे जिंदा लोगों पर नहीं करते हो, आप के काम में कुछ देर हो जाए तो आप कल कर सकते है, लेकिन मेरा काम जिंदा लोगों पर ही होता है, जिसमें आप बिलकुल भी देर नहीं कर सकते है। यह बात सुनकर सतीश को समझ में आ गया कि कोई काम बड़ा या छोटा नहीं होता है। बस इंसान की सोच बड़ी होनी चाहिए।
रचनात्मकता की ओर:
मौलिक सृजन:
आसपास:
पाठ से आगे:
प्रश्न 1
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‘स्वयं अनुशासन’ पर कक्षा में चर्चा कीजिए तथा इससे संबंधित तक्तियाँ बनाइए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
विद्यालय में अनुशासन से संबंधित कुछ बातें: Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 2 मैं बरतन माँगूँगा Additional Important Questions and Answers (क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति (2): शब्द-संपदा
प्रश्न 1
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लिंग परिवर्तन कीजिए। 1. दादी 2. पिता
Solution & Step-by-Step Answer:
1. दादा 2. माता
प्रश्न 2
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निम्न शब्दों के विलोम शब्द लिखिए। 1. डर × …………. 2. विद्वान × …………..
Solution & Step-by-Step Answer:
1. निडर 2. मूर्ख
कृति (3): स्वमत अभिव्यक्ति
प्रश्न 1
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‘जीवन में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण स्थान है।’ अपने विचार लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
शिक्षा का हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा वह है, जो मनुष्य को ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ उसके हृदय एवं आत्मा का विकास करती है। शिक्षा हमारी समृद्धि में आभूषण, विपत्ति में शरण स्थान और समस्त कालों में आनंद देने वाली होती है। जीवन लक्ष्य की पूर्ति के लिए शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा हमें स्वयं के विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी प्रेरित करती है। शिक्षा ही मनुष्य को जीवन की विविध परिस्थितियों से समायोजन करना सीखाती है।
(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति (1): आकलन कृति
प्रश्न 1
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संजाल पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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समझकर लिखिए। विश्वकर्मा सर को इसका शौक था।
Solution & Step-by-Step Answer:
पढ़ने का
कृति (2): शब्द-संपदा
प्रश्न 1
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वचन परिवर्तन कीजिए। 1. अध्यापकगण 2. पुस्तक
Solution & Step-by-Step Answer:
1. अध्यापक 2. पुस्तकें
प्रश्न 2
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समानार्थी शब्द लिखिए। 1. शौक 2. गजब
Solution & Step-by-Step Answer:
1. रुचि 2. अद्भुत
(ग) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति (1): आकलन कृति
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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निम्नलिखित विधान सत्य है या असत्य पहचानकर लिखिए। 1. विश्वकर्मा सर का कमरा बरतनों से भरा हुआ था। 2. विषय बदलने से दिमाग में ताजगी आ जाती है।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. असत्य 2. सत्य
प्रश्न 3
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कारण लिखिए। लेखक के साथी उनको चिढ़ाते थे क्योंकि
Solution & Step-by-Step Answer:
लेखक के साथी उनको चिढ़ाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि लेखक इधर-उधर की पुस्तकों से समय बरबाद करते हैं।
कृति (2): शब्द-संपदा
प्रश्न 1
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गद्यांश से शब्द-युग्म शब्दों की जोड़ियाँ लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
1. मंद – मंद 2. एक – एक
प्रश्न 2
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गद्यांश से विरुद्धार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए। 1. खाली × ……………. 2. मोटी × ……………
Solution & Step-by-Step Answer:
1 भरा 2. पतली
कृति (1): आकलन कृति
प्रश्न 1
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समझकर लिखिए। 1. विश्वकर्मा सर का यह क्रम ज्यों-का-त्यों बना रहा – 2. भोजन बनाने में इतना समय लगता है –
Solution & Step-by-Step Answer:
1. बरतन धोने का 2. करीब दो घंटे
प्रश्न 2
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कारण लिखिए। विश्वकर्मा सर हमेशा बरतन धोते थे क्योंकि
Solution & Step-by-Step Answer:
विश्वकर्मा सर हमेशा बरतन धोते थे क्योंकि खाना बनाने में पूरे दो घंटे लगते हैं और बरतन धोने में सिर्फ दस मिनट।
कृति (2): शब्द-संपदा
प्रश्न 1
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समानार्थी शब्द लिखिए। 1. समय 2. खुश
Solution & Step-by-Step Answer:
1. वक्त 2. प्रसन्न
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
विलोम शब्द लिखिए। 1. मित्र × …………. 2. मूर्ख × …………
Solution & Step-by-Step Answer:
1. शत्रु 2. विद्वान
कृति (3): स्वमत अभिव्यक्ति
प्रश्न 1
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‘आदर्श शिक्षक’ पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
शिक्षक एक विशाल इमारत की नींव की तरह होते हैं। जिस इमारत की नींव ही कमजोर हो, तो उस इमारत का कोई भविष्य नहीं होता है। उसी तरह आदर्श शिक्षक न हो तो विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित नहीं होता। शिक्षक अनुशासन प्रिय होते हैं। अपने विषय को वे इस तरह समझाने का प्रयत्न करते हैं, जिसे सामान्य से सामान्य विद्यार्थी भी समझ सकें। वे अपने विद्यार्थियों में संयम, सेवा, त्याग, सहयोग और देशभक्ति के बीज बोते हैं।
मैं बरतन माँगूँगा Summary in Hindi लेखक-परिचय: हमराज भट्ट हिंदी के आधुनिक साहित्यकारों में से एक है। हमराज भट्ट की बालसुलभ रचनाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। इनकी कहानियाँ, निबंध, संस्मरण विविध पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होती रहती हैं। गद्य-परिचय: आत्मकथात्मक कहानी: आत्मकथा हिंदी साहित्य में गद्य की एक विधा है। इसमें स्वयं या कहानी का कोई पात्र ‘मैं’ के माध्यम से पूरी कहानी का आत्मचित्रण करता है। प्रस्तावना: प्रस्तुत पाठ ‘मैं बरतन माँगूंगा’ में लेखक हमराज भट्ट जी ने समय की बचत, समय का उचित उपयोग एवं सारांश: प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बचपन के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा है कि उन्हें बचपन में विषय के अतिरिक्त दूसरी पुस्तक पढ़ने की आदत नहीं थी। वह अपने गुरु जी के डर से पाठ्यक्रम की कविताएँ ही रट लिया करते थे। उनके पिता जी कभी पत्रिका लाते थे तो वह लेखक को पढ़ने के लिए नहीं मिलता था। आठवीं पास करने के बाद नौवीं में पढ़ने के लिए उनके घरवालों ने उन्हें अच्छी नसीहत देकर शहर भेज दिया। उनके साथ गाँव के दो साथी और थे। तीनों एक साथ कमरा लेकर उसमें रहने लगे। वह जिस कमरे में रहते थे उसके सामने उनके तीन अध्यापक भी रहते थे पुरोहित जी, खान साहब और विश्वकर्मा जी। तीनों अध्यापक साथ-साथ बनाते खाते थे; उनमें कोई भेदभाव नहीं था। लेखक और उनके साथियों ने गौर किया कि विश्वकर्मा सर हमेशा बरतन माँजते थे जबकि पुरोहित और खान साहब कभी बरतन नहीं माँजते थे। विश्वकर्मा सर को पढ़ने का भी शौक था। वह हर वक्त किताबों में ही डूबे रहते। उन्हें देखकर लेखक भी उनसे पुस्तकें लेकर पढ़ना चाहता था। एक दिन किसी बहाने से वह उनके कमरे में गया तो वहाँ अनेक पुस्तकों को देखा। आलमारी ना होने के कारण पुस्तकें जमीन पर ही पड़ी थी। विश्वकर्मा सर ने लेखक को देख लिया और उन्हें कुछ पुस्तकें भी पढ़ने को दी। धीरे-धीरे लेखक और विश्वकर्मा सर में खूब जमने लगी। एक दिन लेखक ने उनसे रोज सुबह-शाम बरतन माँजने का कारण पूछा। विश्वकर्मा सर ने विस्तार से बताया, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बर्तन माँजने में दस मिनट का समय लगता है जबकि खाना बनाने में दो घंटे का समय लगता है तथा धुएँ और शोर को भी सहना पड़ता है। अत: वह बरतन माँजने का काम करके १ घंटा ५० मिनट बचा लेते हैं, जिसमें वह पढ़ाई करते हैं। विश्वकर्मा सर के इस तर्क को सुनकर लेखक बहुत प्रभावित हुए और वह भी उस दिन अपने साथियों को बोले कि अब दोनों समय का बरतन मैं ही माँगूंगा और तुम दोनों खाना बनाया करो। उनके साथी उनको मूर्ख समझने लगे जबकि लेखक जानते थे कि मूर्ख कौन है। शब्दार्थ: मुहावरे: 1. किताबी कीड़ा होना – केवल पढ़ने में ही लगे रहना। |

